Friday, November 11, 2016

अध्यापको के वेतन को लेकर सह्याक संचालक संपरीक्षा निधि ने संचालक संपरीक्षा निधि से मांगा मार्गदर्शन,पत्र ब्लॉग में


6वे वेतनमान के आदेश में वेतन निर्धारण का कोई फॉर्मूला ही नहीँ
स्थानीय संपरिक्षा निधि जबलपुर ने अध्यापकों के छठवें वेतन मान में निकाली 7 खामियां 8वी खामी पर भी उनकी नज़र थी पर जाने क्यों छुपा लिया । नये वेतनमान निर्धारण में स्थानीय संपरिक्षा निधि से अनुमोदन ज़रूरी है यदि ये बिना मार्गदर्शन के अनुमोदन नहीँ करेंगे तो अब शासन का मार्गदर्शन ज़रूर जारी होगा और बिन्दुवार होगा....यही हमारी 4 दिन तक स्थानीय संपरिक्षा निधि में चक्कर काटने   की  सफलता है । गौर करने की बात है कि स्थानीय संपरिक्षा निधि जबलपुर ने वेतन निर्धारण के मूल आधार पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया है यहाँ तक कह दिया है कि ऑर्डर में वेतन निर्धारण का कोई फॉर्मूला ही नहीँ है इससे साफ जाहिर होता है कि यदि कोई वेतन निर्धारण करता भी है तो वह मनगढ़ंत ही होगा । स्थानीय संपरिक्षा निधि ने सेवा काल की गणना 2007 से करने को गम्भीरता से लिया  है जिसके चलते मिली हुई क्रमोन्न्ती पर भी प्रश्न खड़ा हो गया है । कुल मिलाकर लगता नहीँ ये गणना पत्रक कुछ लाभ देने की नियत से बनाया गया है । यदि जल्दी और सार्थक मार्ग दर्शन नहीँ मिला तो पूरे प्रदेश में जितने जिले हैं उतने ही तरह के वेतन निर्धारण देखने को मिलेगा ।
डी के सिंगौर

Thursday, November 10, 2016

कूटनीति कर के अध्यापको के वेतन को वेतन में उलझा दिया सरकार ने - अजितपाल यादव (भोपाल)

       बेहद सरल कूटनीति होती है की अगर कोई संवर्ग मूल हक की और ध्यान केन्द्रित करने लगे तो उसे आर्थिक मामलों पर उलझा दो । और हुआ भी यही । अभी जैसे ही सरकार को लगा कि अरे ये संघर्ष समिति ने कैसा ज्ञापन दे दिया?  अरे ये तो मूल समस्याों को पकड़ रहे हैं । रोको रोको इनको ।
बस यहीं से शाकएब्जार्वर्स  का काम शुरू हुआ और स्वागत रूपी सम्मेलन और सम्मोहन  पर जाकर खत्म हुआ । दूसरी तरफ बड़ा वर्ग नाना प्रकार की गणना की टेबल, कुर्सी, सोफा में उलझा रहा और अपने ज्ञान का लोहा मनवाता रहा ।
         आप देखना की नवंबर माह के समाप्त होते होते बहुत कुछ जादूगरी हमें समझ आने वाली है  और ये समझ आते ही हम फिर खुद को भयंकर रूप से ठगा महसूस करेंगे । और फिर वही आर्थिक मामलों पर पूरा ध्यान अटक जाएगा ।

    एक अधिकारी से चर्चा का सार :-
(1)अंतरिम राहत किश्तों की वसूली (समायोजन) 2013 से होगी
(2) क्रमोन्नति प्राप्त को अगला वेतन बैंड नहीं मिलेगा
(3) सहायक अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक क 3 प्रतिशत की वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी

           ये गणना पत्रक की भाषा अनुसार बताया गया है । इसके अलावा उनके द्वारा स्पष्ट किया गया की अब ये सारी विसंगतियाँ नगरीय व ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग दूर करेगा । क्योंकि वित्त विभाग नियमित कर्मचारी के लिए स्पष्ट करता है और अध्यापक कर्मचारी नहीं है ।
           मेरा अनुमान है की एक बार फिर हमें बजट सत्र मार्च 2017 तक के लिए अटका दिया गया है और इस बार तो डाबर जन्मघुट्टी पिला कर घर भेजा गया है । मेरा सभी से अनुरोध है की सभी संघों से ऐसे शाकएब्जार्वर्स को निकाल बाहर किया जाए जो हमारे हितों के विरूद्ध शतरंज की बिसात बिछाते हैं और हमें मोहरों के रूप में इस्तेमाल करते हैं ।
    

जबलपुर में स्थानीय निधि संपरीक्षा ने नहीं किया अध्यापको के वेतन का अनुमोदन ,अध्यापकों को बैरंग लौटा दिया।

डीके सिंगोर/मंडला। अध्यापक संवर्ग को जनवरी 2016 से मिलने वाले 6पे के गणना पत्रक के आदेश को सरकार ने 10 महीने बाद जारी तो कर दिया और अनेक संकुलों मे नया वेतनमान आदेश मिल भी गया परंतु सही वेतन के निर्धारण का दायित्व निभाने की जिम्मेदारी जिस संपरीक्षा निधि कार्यालय को सौपी गई वह ,ही गणना पत्रक को समझ नहीं पा रहा है।
         जबलपुर संभाग के जिलों से सही निर्धारण कराने संपरीक्षा निधि कार्यालय जबलपुर ने अध्यापकों के गणना पत्रक के सम्बन्ध मे एक मार्गदर्शन पत्र जारी कर अध्यापकों को बैरंग लौटा दिया।

कहाँ हो रही कठिनाई
संपरीक्षा निधि कार्यालय मे विगत 5 दिनों से वेतन निर्धारण का अनुमोदन कराने जा रहे अध्यापक संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष डी के सिंगौर और नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि संपरीक्षा के अधिकारी निम्न कठिनाइयों को बता रहे है-
1-सहायक अध्यापक,अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक की वेतन तालिका एक समान नियमों से नहीं बनी।
2-आदेश मे 2.1 और 2.3 मे वेतन निर्धारण को लेकर विरोधाभास है।
3-3000 -5000 वेतनमान वाले सहायक अध्यापक को क्रमोन्नति 3500-6000 के वेतनमान पर हुई जबकि तालिका मे 4000 रु का वेतनमान दिया गया है।
4-यही स्थिति क्रमोन्नत हुए अध्यापक के साथ है जारी तालिका मे उसका तदस्थानिक मूल वेतन तालिका से या तो मेल नहीं खाता या  कम है।
5-क्रमोन्नत वरिष्ठ अध्यापक के ग्रेड पे को 3600 से 4200 करने पर 4200 ग्रेड पे की तालिका ही आदेश मे मौजूद नहीं है।
6-यदि अध्यापक संवर्ग के तदस्थानिक वेतनमान के अनुरूप वेतन निर्धारण किया जाए तो एक साथ नियुक्त एक अध्यापक और अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक पद के वेतनमान मे पदोन्नति प्राप्त अध्यापक का वेतन गैर पदोन्नत या क्रमोन्नत अध्यापक से कम हो रहा है।
7. वेतन निर्धारण के लिये एक भी उदाहरण प्रारूप जारी नहीँ किया गया है वेतन निर्धारण को लेकर अध्यापक संकुल प्राचार्य से लेकर डी ई ओ और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे है
       लेकिन क्षेत्रीय स्थानीय निधि सम्परीक्षक  जिनका अनुमोदन अनिवार्य है के द्वारा स्पष्ट नियमों के अभाव में अनुमोदन नहीँ किये जाने से  अध्यापक एक बार फिर भोपाल की ओर रुख कर दिया है अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अब वे संपरीक्षा निधि कार्यालय से प्राप्त मार्गदर्शन को लेकर DPI जाएंगे।

झबुआ का वेतंन निर्रधारण ,जिसके लिये कोषालय से सहमति मिली है ,वेतन निर्द्धारण पत्रक,अंडर टेकिंग,कार्यालयीन आदेश ,सेवा पुस्तिका ,विकल्प - अरविन्द रावल

      
अरविन्द रावल - मध्यप्रदेश में पहली बार आधिकारिक रूप से अध्यापक सवर्ग को देय छठे वेतनमान का वेतन निर्धारण झाबुआ जिले के शासकीय हाई स्कुल करडावद बड़ी के प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव एवम् लेखापाल शिक्षक श्री योगेन्द्र दीक्षित द्वारा अध्यापक अरविंद रावल का आज किया गया। छटे वेतनमान का सबसे पहले वेतन निर्धारण करने पर जिले के समस्त अध्यापको की और से प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव एव लेखापाल शिक्षक श्री योगेन्द्र दीक्षित का आभार व्यक्त किया गया और धन्यवाद ज्ञापित किया ।
             जिले के हम अध्यापक  साथी फ़िरोज़ खान, शरद गुप्ता, इलियास खान, मनीष पवार और मेरे द्धारा संशोधित गणना पत्रक जारी होने की दिनांक से ही इस पर अध्ययन करने लगे और जिले में एक समान रूप से वेतन निर्धारण हो सके इस उद्देश्य को लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारियो और लेखापालों से उक्त आदेश की हर तरह से व्याख्या कर समझाया गया ! हमने रतलाम के भाई सुरेश यादवजी से भी सही गणना पत्रक बनाने में सहयोग लिया ! पन्द्रह दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद हम साथियो दिन रात एक कर ने फाइनल एक टेबल बनाई जिसे जिले के अधिकारियो और लेखापालों द्धारा समझा गया ! हमारे बड़ेभाई स्वरुप श्री जफ़र खान वरिष्ठ लेखापाल द्धारा हमारे द्धारा बनाये गए गणना पत्रक सबसे पहले अध्ययन कर सहमति दी और उन्ही के नेतृत्व में हम सभी ने जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियो के साथ कई घण्टो की मैराथन बैठक करने बाद हमारे द्धारा बनाई गई तालिका के अनुसार झाबुआ जिले के अध्यापको का एक समान वेतन निर्धारण करने पर सहमति प्रदान की हे ! उसी परिपेक्ष्य में हाई  स्कुल करडावद बड़ी के प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव द्धारा न सिर्फ जिले में बल्कि प्रदेश सबसे पहले  अधिनस्त अध्यापको का नियमानुसार वेतन निर्धारण कर दिया गया हे और अध्यापको की सर्विस बुक अवलोकन हेतु संपरीक्षा निधि कार्यालय इंदौर भेजी जा रही हे !
           हम साथियो द्धारा बनाये गए गणना पत्रक को प्रदेश के सभी जिलो  द्धारा पसन्द किया गया हे और करीब चालीस से ज्यादा जिलो में हमारे द्धारा बनाई गई सारणी के अनुसार ही वेतन निर्धारण करने का कार्य किया जा रहा हे ! झाबुआ जिले में अध्यापको का छठा वेतनमान एक समान निर्धारण करवाने की कार्यवाही करने के लिए सहायक आयुक्त महोदय, जिला कोषालय अधिकारी महोदय  और वरिष्ठ लेखापाल जफ़र खान सर का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा हे ! हम एक बार फिर झाबुआ जिले  अध्यापको की और से छठे वेतनमान के निर्धारण करवाने पर सहयोग करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारियों के प्रति आभार प्रकट करते हे !
    








आज एक समस्या से खुद रूबरू हुआ - अजित पाल यादव (भोपाल)

आज एक समस्या से खुद रूबरू हुआ ।
एक तरफ तो मुखिया जी कहते हैं की इतना पढाओ की निजी स्कूलों में ताले लग जाएं और दूसरी तरफ जिला शिक्षा अधिकारी मुखिया की सोच की धज्जियां उड़ा देते हैं ।
बात है किसी भी शासकीय आदेश की गलत व्याख्या करने की ।
अभी एक आदेश निकला था मूल पदसंरचना का। जिसमें किसी भी शाला हेतु शिक्षकों की नियुक्ति की अवधारणा को स्पष्ट करने की व्याख्या की थी । पर आज मैंने खुद उसकी धज्जियां उढ़ते देखी ।
आदेश के अनुसार विज्ञान समूह से गणित, कला से सामाजिक विज्ञान और भाषा से अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई है । पर आप ये बताओ की जहाँ इनमें से एक भी न हो और वो स्कूल 1967 से संचालित हो तो क्या कहोगे?  और तुक्का ये की नियम नहीं है । मतलब ये हुआ की शाला को और विद्यार्थी को यतीम कर दो । खुद ही अशासकीय में पहुँच जाएगा ।
ये समस्या सबको आनी है । इसलिए चैन से सोना है तो जाग जाओ । और मामा को स्वागत के अलावा जमीनी हकीकत बताओ ।
संघर्ष समिति जिंदाबाद ।
अध्यापक एकता जिंदाबाद ।
(लेखक स्वयं अध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं)

आखिर क्यों सरकारी स्कूल खतरे में ?- अजित पाल यादव (भोपाल)


 अजित पाल यादव -  यदि हम ग्रामीण क्षेत्रों पर नजर डालें तो विगत 3 वर्षें में बहुत तेज गति से अशासकीय शालाओं को मान्यता प्रदान की गई है । ये निजी शालाएं आर टी इ के अंतर्गत नि:शुल्क शिक्षा के नाम पर सरकारी विद्यालयों से लगभग शतप्रतिशत सवर्ण विद्यार्थियो को खींच चुकी हैं । अब केवल पिछड़ी और अनुसूचित जाति व जनजाति के ही बच्चे बचे हैं । यदि आप मेरी बात से असहमत हों तो कृपया टिप्पणी अवश्य करें । यही स्थिति रही तो आने वाले 5-6 वर्षों में बहुत अधिक शालाओं में 10 से कम दर्ज संख्या होने वाली है । और ये शाला समाप्ति का मार्ग है ।
       शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षक पदसंरचना का यदि अध्ययन करेंगे तो ये भी ताबूत में ठुकती कील नजर आएगी । अभी 14.09.16 को म प्र शासन द्वारा पुनः आदेश जारी किया है जिसमें विषयवार वरियता जारी की है । कृपया आप सभी आदेश प्राप्त कर अध्यापक करें । यदि गणित, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान का शिक्षक नहीं भी है तो शालाओं को खाली रखा जाएगा पर हिंदी, विज्ञान संस्कृत के शिक्षक की पदस्थापना नहीं की जाएगी ।

 ये स्थिति 140 की दर्ज संख्या पर लागू कर दी गई है ।

भयावह स्थिति :-
घटती दर्ज संख्या और अतिशेष होता अध्यापक । पद्दोन्नति लगभग अकल्पनीय हो चुकी है । आज और अभी से आप अंदाजा लगा लो की नए आदेशों के अनुसार आप अपने जिले में स्वयं को किस शाला में पदस्थ पायेंगे । मेरा ये प्रश्न माध्यमिक शालाओं में वर्तमान में पदस्थ और भविष्य में पदोन्नत होने वाले सहायक अध्यापकों से है । अत्यंत विषम परिस्थिति निर्मित हो चुकी है और हम राज्य परिवहन के बहुत करीब पहुँच चुके हैं ।
इस पूरे मामले को गंभीरता से समझने वाले साथियों से आगृह है की न्यायालय के माध्यम से शासन से ये पूछा जाना चाहिए की क्या 140 से कम विद्यार्थी को हिंदी, विज्ञान, संस्कृत पढने के अधिकार से क्यों वंचित किया जा रहा है?
(लेखक स्वय अध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं )

जाग चुके अध्यापक को लोरी सुनाकर सुलाने की कोशिश-वासुदेव शर्मा (मुख्यमंत्री स्वगात समारोह भाग 1)


वासुदेव शर्मा- सीएम हाऊस के सम्मान समारोह से लौट रहे अध्यापकों के चेहरों से उत्साह गायब था और प्रतिक्रिया कुछ नहीं मिला जैसी थी। मैंने सवाल यह किया कि यह सम्मान समारोह क्यों आयोजित किया गया। जबाव जोरदार था। पांच अध्यापकों की टीम में से एक बोला हक के लिए जाग चुके अध्यापक को सुलाने की कोशिश भर थी यह, लेकिन  सीएम के रणनीतिकार यहां भी फैल हो गए। अध्यापकों के पांच संगठनों में से चार इस आयोजन से बाहर रहे और अध्यापक संघर्ष समिति पहसे से ज्यादा भरोसेमंद हो गई। अब जो संघर्ष समिति में बचे हैं, वे स्कूलों को बचाने तथा शिक्षा विभाग में संविलियन की लड़ाई को निर्णायक तरीके से लड़ सकेंगे।
         राज्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव ने सम्मान समारोह में न जाने का जो साहसिक निर्णय लिया है, उसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए। आयोजन से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वे सीएम हाऊस जरूर जाएंगे। जगदीश के ऊपर दबाव भी था। आयोजकों ने अनगिनत फोन उन्हें किए। यहां-वहां से दबाव भी डलवाया। सम्मान समारोह में शामिल होने के सवाल पर जगदीश, करतार सिंह, दिनेश शुक्ल, नागेंद्र त्रिपाठी जैसे अध्यापक नेता एक दिन पहले भोपाल में बैठे भी, जहां यह निर्णय लिया कि हमें सम्मान की वजाय संघर्ष के साथ रहना चाहिए। मतलब स्पष्ट है कि जगदीश यादव और उनकी टीम अध्यापक संघर्ष समिति के साथ पूरी ताकत से खड़ी है और यही वो ताकत है जिसने संघर्ष समिति को और भरोसेमंद बनाया है।
          सम्मान समारोह के आयोजक जिनमें अधिकांश वे लोग शामिल थे, जिनका जन्म ही मुरलीधर पाटीदार की आलोचना करके हुआ और यही लोग 6 नवंबर के सम्मान समारोह में  मुरलीधर पाटीदार के भाषण पर तालियां बजा रहे थे। सम्मान समारोह के इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर गंभीरता से सोचेंगे, तब आप पाएंगे कि आयोजक अपने ही समर्थकों की नजरों में कहां पहुंच गए होंगे। इस सम्मान समारोह के बाद कद मुरलीधर पाटीदार का ही बड़ा है और नुकसान में कौन पहुंचा, सम्मान कार्यक्रम के बाद यह अध्यापक समझ चुके हैं।
           अध्यापक संघर्ष समिति के तीन सदस्यों बृजेश शर्मा, मनोहर दुबे एवं राजेश नायक के बारे में सम्मान समारोह के आयोजकों की पहले ही राय थी कि यह लोग सम्मान समारोह की वजाय संघर्ष समिति के साथ रहेंगे, शायद इसीलिए इन्हें बुलाने में ज्यादा ताकत खर्च नहीं की गई। मुख्यमंत्री के सम्मान समारोह के जरिए सरकार ने जगदीश यादव, बृजेश शर्मा, मनोहर दुबे एवं राजेश नायक को एक साथ कर दिया। इन्होंने भी बिना देर किए 14 नवंबर को संघर्ष समिति की बैठक बुलाकर अगली रणनीति बनाने की घोषणा कर दी है, यही सम्मान समारोह के रणनीतिकारों की सबसे बड़ी असफलता है, वे खुद ही संघर्ष के रास्ते से अलग हो चुके हैं। सीएम हाऊस से लौट रहे अध्यापकों के चेहरों की निराशा आयोजकों के फ्लाप हो जाने का सबूत भी है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार है।)

राज्य शासन का सेवा पुस्तिका के सबन्ध में आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016

राज्य शासन का सेवा पुस्तिका  के सबन्ध में आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 

सेवा पुस्तिका की डुप्लीकेट कॉपी कार्यलय में रखी जाए ,एक कॉपी कर्मचारी को भी प्रदान की जाये ,इंक्रीमेंट लगाने पर कर्मचारी के भी हस्ताक्षर करवाये जाएँ ,डिजिटल सेवा पुस्तिका  भी बनाई जाए , आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 ।
आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 पीडीऍफ़ में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करे 






यात्रा भत्ता ,दैनिक भत्ता भोजन भत्ता एवं ठहराव भत्ता की दरो में संशोधन आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016 एव 5 सितम्बर 2012

यात्रा भत्ता ,दैनिक भत्ता भोजन भत्ता  एवं ठहराव भत्ता की दरो में संशोधन आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016

आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016 को पीडीऍफ़ में देखने के लिए इस लिंक को ओपन करें

राज्य वेतन आयोग की अनुसंशा अनुसार राज्य शासन के कर्मचारियों को दे यात्रा भत्ते की दरो का पुनरीक्षण 5 सितम्बर 2012
आदेश दिनाक 5 सितम्बर 2012 पीडीऍफ़ में देखने के लिए इस लिंक को ओपन करें  


 

Wednesday, November 9, 2016

हर जिले में अलग वेतन निर्धारण और अलग नीयम देखिये कितने प्रकार से गणना की जा रही है और असमानता क्या है ।

 देखने में आ रहा है की विभिन्न जिलो में अलग तरह से वेतन निर्धारण किया जा रहा है नरसिहपुर में 2007 से गणना कर के 6 टे वेतन के आधार पर तिन और दो वेतन वृद्धि प्रदान की गयी है।  झबुआ में 2007 में 5 वे वेतन में 2 और 3 वेतन वृद्धि लगा कर 6 टा वेतन मान प्रदान किया गया है 31 दिसम्बर को भी वेतन वृद्धि प्रदान की गयी है। अलीराजपुर में 6टे वेतन मान के आधार पर प्रारंभिक वेतन प्रदान किया गया है और 31 दिसम्बर को में भी वेतन वृद्धि लगायी गयी ही। जबकि रतलाम में 31 दिसम्बर तक 5 वे वेतन मान के आधार पर गणना कर के वेतन मान  दिया गया है ,व अध्यापक को क्रमोन्नति  नही लगायी गयी है। इसी प्रकार विद्यमान वेतन के सामने तत्स्थानी वेतन देखकर और सेवा अवधि देखकर भी गणना की गयी है। कई जगह आई आर की 2013 से वसूली भी की गयी है। यंहा हमने 1998  के अध्यापक संवर्ग की गणना बताई है आप स्वयं असमानता देखें।   



पदोन्नति में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ाई सुनवाई की तारीख

पदोन्नति में आरक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाकर 23 नवंबर कर दी है। इस मामले में मप्र सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसके बाद तारीख आगे बढ़ा दी गई।

जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की डबल बेंच इस मामले की सुनवाई की। इसके पहले सितंबर में बेंच के एक जज के बीमार होने से सुनवाई आगे बढ़ गई थी। हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण रद्द करने और 2002 से अब तक हुए प्रमोशन को रिवर्ट करने का आदेश दिया था। मप्र सरकार ने इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को रद्द कर चुका है। अजाक्स के अध्यक्ष जेएन कंसोटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हमें भी इंतजार है।

दोनों पक्षों के पास अपने-अपने तर्क

सरकार : राज्य सरकार 2002 से 2016 तक हुए प्रमोशन को रिवर्ट करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। सरकार का कहना है कि भले ही मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 गलत हों, लेकिन अब तक हुए प्रमोशन रिवर्ट न किए जाएं।

सपाक्स : अनारक्षित वर्ग के याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में तर्क देंगे कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर ही हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। यदि सरकार 2002 के नियमों को गलत मान रही है, तो पिछले 14 सालों की पदोन्नति को कैसे जायज ठहरा सकती है।
                 



एनसीईआरटी सिलेबस से प्रश्न-पत्र का प्रारूप भी बदलेगा

प्रदेश के स्कूलों में एनसीईआरटी सिलेबस लागू होने के बाद स्कूली शिक्षा में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। पाठ्यक्रम लागू होने पर पढ़ाई के साथ-साथ बोर्ड की परीक्षा पैटर्न में भी कुछ अंतर आ जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एनसीईआरटी का सिलेबस एक्टिविटी बेस्ड है, जिससे बच्चों को सीखने में आसानी होती है।

स्कूल शिक्षा विभाग की पदेन सचिव दीप्ती गौड़ मुकर्जी के मुताबिक एनसीईआरटी का सिलेबस लागू होने के बाद बोर्ड की परीक्षा में प्रश्न-पत्र का पैटर्न चेंज होगा। प्रश्न-पत्र में वैकल्पिक प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही मौजूदा दौर में पूछे जाने वाले प्रश्नों की जगह अवधारणा पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे।

शिक्षकों की दी जाएगी ट्रेनिंग
नया सिलेबस 2017 से लागू होगा। इसके लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी के भोपाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन से इस संबंध में बातचीत भी की है। जल्द ही पहली से सातवीं तक के शिक्षकों को यहां ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही 9वीं से 12वीं के शिक्षकों को भी इसे लेकर ट्रेनिंग दी जाएगी।

16 करोड़ का बोझ
मप्र पाठ्य पुस्तक निगम अगले शिक्षण सत्र के लिए नई किताबें छापेगा। छपाई से सरकार पर 16 करोड़ स्र्पए का बोझ आएगा।

500 और 1000 के पुराने नोट बंद ,कैसे बदलेंगे ? कन्हा चलेंगे ?ATM क्या काम करेंगे ? ई पेमेंट होगा या नहीं ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट को मंगलवार आधी रात से अमान्य घोषित करते हुए इस निर्णय के कारण उत्पन्न स्थितियों को देखते हुए 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक कुछ खास व्यवस्थाएं भी की हैं.

यंहा चलेंगे पुराने  नोट
इसके तहत अस्पतालों, सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल एवं सीएनजी गैस स्टेशनों, रेल यात्रा टिकट काउंटरों, शवदाह गृहों, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक छूट रहेगी. दुग्ध बिक्री केंद्रों, पेट्रोल एवं सीएनजी स्टेशनों आदि को स्टॉक एवं ब्रिकी का रजिस्टर रखना होगा. उन्होंने कहा कि 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये, 10 रुपये, 5 रुपये, एक रुपये के नोट और सभी सिक्के प्रचलन में रहेंगे और वैध होंगे.

ATM कैसे काम करेंगे 
मंगलवार आधी रात से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट अब महज कागज के टुकड़े बनकर रह गए हैं. ये सारे नोट गैरकानूनी माने जाएंगे. प्रधानमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 9 नवंबर को बैंक बंद रहेंगे और बुधवार गुरुवार को  दो दिनों तक कुछ एटीएम भी काम नहीं करेंगे.प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल शुरुआत के दिनों में खाते से धनराशि निकालने पर प्रतिदिन 2000  हजार रुपये और प्रति सप्ताह 20 हजार रुपये की सीमा रखी गई है. पीएम मोदी ने 2000 रुपये और 500 रुपये के नए नोट जारी किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि प्रारंभ में 4000 रुपये के नोट बदले जा सकेंगे और 25 नवंबर से 4000 रुपये की सीमा में वृद्धि की जाएगी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बयान में  मध्यरात्रि से 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के प्रचलन को समाप्त करने की घोषणा की,बयान अनुसार  जरूरी व्यवस्था करने के लिए कल एक दिन बैंक जनता के लिए बंद रहेंगे. उन्‍होंने कहा कि ‘यह जानकारी गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए सभी को इसी समय एक साथ दी जा रही है.रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों को बहुत कम समय में काफी व्यवस्था करनी है. ऐसे में कल बैंक बंद रहेंगे.’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि " बुधवार को बैंक बंद रहेंगे और कुछ एटीएम बुधवार और गुरुवार को बंद रहेंगे. उन्होंने कहा कि बैंकों और डाकघरों के कर्मचारी नई  व्यवस्था को उपलब्ध समय में सफल बनाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे. मोदी ने कहा कि चेक, बैंक ड्राफ्ट या अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों के भुगतान पूर्ववत रहेंगे और यह जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि इसके कारण लोगों को कुछ परेशानियां पेश आएंगी. लेकिन मेरा आग्रह होगा कि देशहित में वे इन कठिनाइयों को नजरअंदाज करें. हर देश के इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं जब व्यक्ति उस क्षण का हिस्सा बनना चाहता है और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनना चाहता है.ऐसे गिने-चुने मौके आते हैं और यह ऐसा एक मौका है.’मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार देश में गहरी जड़ें जमा चुका है.भ्रष्टाचार, जाली मुद्रा और आतंकवाद नासूर बन चुका है और अर्थव्यवस्था को जकड़ लिया है. हमारे दुश्मन जाली नोटों के जरिए भारत में रैकेट चला रहे हैं ."





500 और 2000 रुपये के नए नोट जो जल्‍द किए जाएंगे जारी...

पीएम मोदी ने कहा कि प्रारंभ में एटीएम से प्रतिदिन प्रति कार्ड 2000 रुपये निकाले जा सकेंगे. नई व्यवस्था के कारण पेश आने वाली कुछ परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आतंकवाद, कालाधन, जाली नोट के गोरखधंधे, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में देश की जागरुक जनता कुछ दिनों तक इस असुविधा को झेल लेगी.



.जानिए कैसे बदले जा सकते हैं 500-1000 रुपये के पुराने नोट

1. बैंकों में जमा कराएं 
अगले 50 दिनों तक इन 500 और 1000 रुपये के नोटों को आप बैंक में जाकर जमा करा सकते हैं.

2. बैंक नहीं तो डाकघर जाएं 
10 नवंबर से 30 दिसंबर तक आप चाहें तो डाकघरों में भी जाकर इनको जमा करा सकते हैं. इसलिए मौजूदा नोटों को लेकर परेशान होने की कतई जरूरत नहीं है.

3. इन तारीखों का रखें ध्‍यान 
इस संबंध में 10 नवंबर और 30 दिसंबर की तारीख आपके लिए खासा महत्‍व रखती है क्‍योंकि इसी दौरान आपके अपने पुराने इन नोटों को बदलना होगा. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इसके लिए कहा कि आपको बिल्‍कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि इस काम को करने के लिए आपके पास पूरे 50 दिन हैं.

4. बैंक की डेट निकले तो RBI है ना...
कुछ कारणों से जो लोग 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोट 30 दिसंबर तक जमा नहीं करा सकेंगे, वे लोग पहचान पत्र दिखाकर 31 मार्च, 2017 तक नोट बदलवा सकेंगे.

Tuesday, November 8, 2016

अध्यपको के वेतन को उलझा रहे अधिकारी


 6वां वेतनमान को लेकर लड़ाई जीत तो ली गई लेकिन संघर्ष अब भी बाकी है। अब मामला संकुल स्तर पर आकर अटक गया है। चार्ट के हिसाब से अध्यापकों का मासिक मूल वेतन कितना निर्धारित करें इसको लेकर अभी अभी संकुल प्राचार्यों में असमंजस की स्थिति है। 
अध्यापकों के वेतन निर्धारण के लिए चार्ट में जो फार्मूला दिया गया है वो वर्तमान में अध्यापकों को दिए जा रहे वेतन से मैच नहीं हो रहा। ऐसे में यदि अध्यापकों का ज्यादा वेतन निर्धारित कर दिया तो रिकवरी भी निकल सकती है। कम दिया तो अध्यापक भड़क सकते हैं। लिहाजा अधिकांश प्राचार्य जोखिम से बचने के लिए बीच का रास्ता निकालते हुए अध्यापकों से ये वचन पत्र तक भरवाना शुरू कर दिया है कि यदि ज्यादा वेतन का भुगतान कर दिया तो ये वचन दो कि भविष्य में ज्यादा लौटा दोगे या समायोजित कराने तैयार रहोगे। जबकि कुछ प्राचार्य आपस में ही मिल-बैठकर चार्ट के आधार पर अध्यापकों को एक जैसा वेतन देने की योजना बना रहे हैं।
ये है आदेश
अध्यापक संवर्ग के मूल वेतन की टेबल 6480 से 8310 रुपए के मूल वेतन तक दी गई है तो इसी मूलवेतन के हिसाब से छठवें वेतनमान की गणना वेतन निर्धारित करने कहा गया है।
यहां फंसा पेच
जिन अध्यापकों का मूल वेतन ही 7470 है उनका वेतन किस फार्मूले से निर्धारित करें ये चार्ट में है नहीं। चार्ट में दी गई टेबिल में मूल वेतन 7290 और 7500 रुपए दिया गया है। जिन्हें 12 साल हो गए और उन्हें क्रमोन्नति, पदोन्नति के बाद बढ़ा हुआ वेतन मिल रहा है उसके वेतन का चार्ट में जिक्र ही नहीं है।
ये है दुविधा
प्राचार्यों को ये दुविधा है कि यदि ऐसे अध्यापकों को 7290 मूल वेतन के हिसाब से वेतन निर्धारित करते हैं तो वेतन कम हो जाएगा। और मूल वेतन 7500 के हिसाब से गणना कर छठवां वेतनमान का लाभ दे दिया गया तो बाद में जो अंतर की राशि होगी वे अध्यापकों से बाद में वसूलनी पड़ेगी।
9 माह तक दी राहत, अब रिकवरी में भी उलझन
सहायक अध्यापक, अध्यापकों को छठे वेतनमान का लाभ देने से पहले 2013 से अंतरिम राहत दी जा रही है। छठवां वेतनमान जनवरी 2016 से दिए जाने के आदेश के बाद अंतरिम राहत दिया जाना भी बंद हो गया। लिहाजा 9 माह तक अध्यापकों को किश्तों में दी गई राहत वसूलना या समायोजित करने भी टेंशन हो रही।
इसे ऐसे समझें
सहायक अध्यापकों को वर्तमान में 2100 से 3 हजार रुपए तक अंतरिम राहत मिल रही है। जबकि अध्यापकों को 7800 रुपए अंतरिम राहत मिली। छठवां वेतनमान 1 जनवरी 2016 से देना है, इसलिए जनवरी से सितम्बर तक यानी 9 माह अध्यापकों को जो अंतरिम राहत दी गई है। वे वसूल (समायोजित ) की जाएगी, लेकिन वेतन निर्धारित न होने एरियर्स की राशि ज्यादा निकल रही या राहत की ये भी तय नहीं कर कर पा रहे।
"अध्यापकों को छठे वेतनमान के हिसाब से वेतन नहीं दिया जा रहा। संकुल प्राचार्य ये तय नहीं कर पा रहे कि वेतन का निर्धारण कैसे करें? संपरिक्षा निधि कार्यालय से मार्गदर्शन लिया जा कर उसे लागू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।"
- नरेन्द्र त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष,राज्य अध्यापक संघ
"अध्यापकों के वेतन निर्धारण के संबंध में कहां क्या परेशानी आ रही है उसे जल्द दूर किया जाएगा।'' -सतीश अग्रवाल, डीईओ
स्त्रोत भौपाल समाचार ।
        

उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने ई अटेंडेंस पर अध्यापको के लिए अंतरिम रोक लगायी ।

ग्वालियर। अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को सोमवार को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए शिक्षकों की रजिस्टर पर हाजिरी लेने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त लोक शिक्षण संचनालय को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस को चुनौती दी है।
लोक शिक्षण संस्थान ने 25 जून 2016 को एक आदेश जारी कर शासकीय विद्यालय के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की व्यवस्था की थी। इसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं। अरविंद कुमार दीक्षित सहित 150शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता केके श्रीवास्तव ने बताया कि ई-अटेडेंस की व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। दूर-दराज के स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क नहीं आता है। इससे शिक्षक हाजिरी नहीं लगा पा रहे हैं और उनका वेतन कट रहा है। अगर किसी शिक्षक का मोबाइल गिर जाता है और वह मोबाइल नहीं होने से अपनी हाजिरी नहीं लगा पाता है तो उसका वेतन कट जाता है।
श्रीवास्तव ने बताया कि लोक शिक्षण संस्थान का ई-अटेडेंस का आदेश शासकीय कर्मचारी पर लागू होता है। अध्यापक संवर्ग के कर्मचारी नगरीय निकाय व पंचायत के कर्मचारी हैं। इन पर यह आदेश लागू नहीं होता है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिए हैं स्कूल में रजिस्टर रखा जाए, जिसमें शिक्षकों की हाजिर लगाई जाए।

कैसे होते है संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव -सुरेश यादव (रतलाम)

दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क  संयुक्त राज्य अमेरिका जिसे हम अमेरिका भी कहते है ,वंहा  आज 8 नवंबर यानी मंगलवार को राष्ट्रपति के लिए मतदान होने वाला है ,तो आज यह लेख इस लिए की अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव प्रक्रिया किस प्रकार  भारतीय प्रणाली के समान है और किस प्रकार भिन्न होता है आप पढ सकें और समझ , यंहा प्रत्येक लिप वर्ष ( लिप इयर ) में चुनाव  प्रक्रिया सम्पन्न होती है और उसमे  पार्टियों द्वारा अपना उम्मीदवार चयन से लेकर मतदान और शपथ विधि तक के लिए  दिन पहले से तय है ऐसी परम्परा बन गयी है,संविधान अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष  प्रणाली से होता था जन्हा कोंग्रेस (वंहा की संसद कोंग्रेस के उच्च सदन सीनेट और निम्न सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव प्रतिनिधि सभा के सदस्य राष्ट्रपति का निर्वाचन करते थे )  कालांतर में वंहा प्रत्यक्ष प्रणाली अपना ली गयी .

                              



 इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन के बीच मुकाबला है. चुनाव अभियान के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच हुई बहस और आरोप-प्रत्यारोप ने दुनिया भर का ध्यान इस चुनाव की ओर खींचा है.

दुनिया में सबसे ताकतवर माने जाने वाले इस मुल्क के सबसे ताकतवर व्यक्ति का चुनाव काफी लंबा, पेचीदा और घुमावदार होता है. आइए जानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव किस तरह होता है...

इलेक्टोरल कॉलेज के जरिये चुने जाते हैं राष्ट्रपति
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-2 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया का जिक्र है. इसमें 'इलेक्टोरल कॉलेज' के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था है. हालांकि अमेरिकी संविधान निर्माताओं का एक वर्ग चाहता था कि राष्ट्रपति चुनने का अधिकार संसद को मिले, जबकि दूसरा धड़ा सीधी वोटिंग के जरिये चुनाव के हक में था. इन दोनों धड़ों के बीच हुए समझौते के बाद तब यह तरीका वजूद में आया.
जनवरी से नवंबर की शुरुआत तक चलती है प्रक्रिया
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में होते हैं और चुनाव प्रक्रिया जनवरी में शुरू होकर नवंबर के शुरुआती हफ्ते में मतदान तक चलती है. नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले मंगलवार को वोटिंग होती है और 20 जनवरी को इनॉग्रेशन डे पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करते हैं और उनका चार वर्षों का कार्यकाल शुरू हो जाता है.डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच ही मुकाबलायहां व्यवस्था भले ही बहुदलीय है, लेकिन आम तौर पर जनता दो ही दलों
- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के बीच ही चुनाव करती है. इन दोनों दलों के अलावा लिब्रेटेरियन, ग्रीन और कांस्टीट्यूशन पार्टी  के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी इस चुनाव में किस्मत आजमाते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम योग्यता 35 वर्ष की उम्र है. इसके अलावा  पिछले 14 सालों से अमेरिका में रह रहा हर नागरिक राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी का दावा कर सकता है.

'प्राइमरी' चुनाव से शुरू होती है चुनावी प्रक्रिया
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से 'प्राइमरी' चुनाव के साथ जनवरी में शुरू होती है, जो कि जून तक चलती है. इस दौर में पार्टी अपने उन उम्मीदवारों की सूची जारी करती है, जो राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में उतरना चाहते हैं. इसके बाद दूसरे दौर में अमेरिका के 50 राज्यों के वोटर पार्टी प्रतिनिधि (पार्टी डेलिगेट) चुनते हैं. हालांकि प्राइमरी स्तर पर पार्टी प्रतिनिधि चुनने के लिए अमेरिकी संविधान में कोई लिखित निर्देश नहीं है. इसलिए कुछ राज्यों में कॉकस के जरिये भी पार्टी प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर बैठक कर पार्टी प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है.
क्या होता है प्राइमरी और कॉकस?
कॉकस में पार्टी के सदस्य स्कूलों, घरों या फिर सार्वजनिक स्थलों पर जमा होते हैं और उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जाती है. वहां मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार का चयन करते हैं. वहीं प्राइमरी में मतपत्र के जरिये मतदान होता है. हर राज्य के नियमों के हिसाब से अलग-अलग तरह से प्राइमरी होती है और कॉकस प्रक्रिया भी हर राज्य के कानून के हिसाब से अलग-अलग होती है.फिर पार्टी डेलिगेट्स चुनते हैं राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवारप्राइमरी में चुने गए पार्टी प्रतिनिधि दूसरे दौर में पार्टी के सम्मेलन (कन्वेंशन) में हिस्सा लेते हैं. कन्वेनशन में ये प्रतिनिधि पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं. इसी दौर में नामांकन की प्रक्रिया होती है. इसके साथ ही राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार अपनी पार्टी की ओर से उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनता है.
तीसरे दौर में शुरू होता है चुनाव प्रचार
तीसरे दौर की शुरुआत चुनाव प्रचार से होती है. इसमें अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं. इसी दौरान उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर इस मामले से जुड़े मुद्दों पर बहस भी होती है.
स्विंग स्टेट्स पर उम्मीदवारों का पूरा जोर
आखिरी हफ्ते में, उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत 'स्विंग स्टेट्स' को लुभाने में झोंकते हैं. 'स्विंग स्टेट्स' वे राज्य होते हैं, जहां के मतदाता किसी भी पक्ष की ओर जा सकते हैं. इस वजह से दोनों ही दलों के उम्मीदवार इन राज्यों में जमकर प्रचार करते हैं, ताकि यहां के मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सकें.
वोटर चुनते हैं इलेक्टर, जो करते हैं राष्ट्रपति का चुनाव
चुनाव की अंतिम प्रक्रिया में 'इलेक्टोरल कॉलेज' राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है. हालांकि इससे पहले राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं, जो राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का घोषित समर्थक होता है. ये इलेक्टर एक 'इलेक्टोरल कॉलेज' बनाते हैं, जिसमें कुल 538 सदस्य होते हैं. 'इलेक्टर' चुनने के साथ ही आम जनता के लिए चुनाव खत्म हो जाता है. अंत में 'इलेक्टोरल कॉलेज' के सदस्य वोटिंग के जरिये अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल वोट जरूरी होते हैं.
बहुमत की झोली में चले जाते हैं सारे इलेक्टोरल वोट्स
अमेरिकी राज्य नेब्रास्का और माइने को छोड़ अन्य सभी 48 राज्यों में 'विजेता सब ले जाएगा' वाला नियम लागू है, इसमें जिस उम्मीदवार के ज्यादा इलेक्टर्स जीतते हैं, उसी की झोली में सारे इलेक्टोरल वोट चले जाते हैं. इन दो राज्यों नेब्रास्का और माइने में 'कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट मेथड' इस्तेमाल होता है, जहां प्रत्येक कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के अंदर एक इलेक्टर पापुलर वोट के जरिये, जबकि बाकी के दो इलेक्टर्स पूरे राज्य के पापुलर वोट के जरिये चुने जाते हैं.
हर राज्य में अलग होता इलेक्टर का कोटा
हर राज्य का इलेक्टर चुनने का कोटा तय होता है, जहां कैलीफॉर्निया में 55, टेक्सास में 38, न्यूयॉर्क- फ्लोरिडा में 29 और पेनसिल्वेनिया में 20 इलेक्टर्स होते हैं, वहीं अलास्का, मोंटाना, नार्थ एवं साउथ डकोटा, वर्मोन्ट और वायोमिंग में तीन-तीन इलेक्टर्स होते हैं. यह संख्या हर राज्य से अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) और सिनेट के सदस्यों की कुल संख्या के बराबर होती है. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सदस्य बैठते हैं. इन दोनों सदनों को मिलाकर संख्या होती है 535. इसके अलावा अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से तीन सदस्य आते हैं. यानी इसको मिलाकर 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनते हैं.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए तय रहती है तारीख
अमेरिका में चुनाव के लिए दिन और महीना बिलकुल तय होता है. यहां चुनावी साल के नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग होती है, जो कि इस बार 8 नवंबर को है. वहीं नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तारीख भी तय रहती है, जो कि लीप वर्ष  के अगले वर्ष हमेशा 21 जनवरी को होती है.


Monday, November 7, 2016

निजी विद्यालयों में ताला लगवाने की बात कर के सरकारी विद्यालयों में ताला लागवा रहे हैं मुख्य मंत्री -सुरेश यादव (रतलाम)

कल मुख्यमंत्री  ने अपने सम्मान समारोह में कहा कि अध्यापक इतना पढ़ाएं की,निजी विद्यालयों में ताले लग जाएं ।

लेकिन उनका ध्यान अपनी सरकार के उस निर्णय पर नहीं गया जिसके चलते वह , बैतूल और खंडवा में  कई सरकारी विद्यालयों पर ताले लगवा रही है। संयोग से यह समाचार कल ही प्रसारित हुआ है ।

विदित रहे राज्य सरकार बैतूल और खंडवा जिले में 2-2 मॉडल स्कूल का निर्माण पायलेट प्रोजेक्ट अंतर्गत कर रही है (पायलट प्रोजेक्ट को बाद में पुरे प्रदेश में लागु किया जा सकता है )। जिसके 10 से 25 किलोमीटर के दायरे  में सभी शासकीय विद्यालय बंद कर के उन विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चो को नविन मॉडल विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा । इन विद्यालयों में बच्चो के आने जाने के लिए  परिवहन के साधन भी उपलब्ध करवाए जायेगे यथा स्थिति स्कुल बस से बच्चों को लाया ले जाया जाएगा ।

10 किलो मीटर के दायरे में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर के एक माध्यमिक विद्यालय बनाया जाएगा वंही 25 किलो मीटर के दायरे में सभी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कुल को बंद कर के एक हायर सेकेंडरी बनाया जायेगा।

सरकार की ओर से दावा है कि इसके माध्यम से हमारे विद्यालयों में ,निजी विद्यालयों की तरह सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी । निश्चित रुप से यदि इसके पीछे की सच्चाई यही होती तो उसका स्वागत करना चाहिए ।

लेकिन हकीकत कुछ और है । उस हकीकत के पहले में इस योजना की भूमिका भी बताना चाहता हूँ ।

यह योजना बैतूल के विधायक एवं भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल के नवाचारवादी विचारों  का परिणाम है। श्री खंडेलवाल ने शिक्षा के बजट पर चर्चा के दौरान  कई विद्यालयो को बंद कर के एक विद्यालय बनाने का प्रस्ताव दिया था ।सरकार का मोटा मोटा अनुमान है कि वह प्रत्येक छात्र पर ,अध्य्यापक/शिक्षक  के वेतन ,मध्यान्ह भोजन ,गणवेश,छात्रवृति के अतिरक्त 2250 रूपये खर्च करती है । जबकि इस प्रकार सरकार को 1600 रूपये ही व्यय आएगा।

अब इसका प्रभाव या दुष्परिणाम जो हमे मोटे तौर पर नजर आ रहा है, गाँवों में  प्राथमिक विद्यालय  और माध्यमिक विद्यालय बंद कर दिए जाएंगे ।

उसके ,आगे क्या क्या हो सकता है ? इसका चिंतन आप करें।लेकिन माननिय मुख्यमंत्री की कथनी और करनी का अंतर साफ़ नज़र आ रहा है । सरकारी स्कूलों में ताला लगवा कर निजी विद्यालयों में ताला लगवाने की बात कर रहैं ।(लेखक सवयंअध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं )




पंचायतो के अध्यापको के लिए अनुग्रह राशी बढाई जाए- डी के सिंगौर (मंडला) का पत्र

प्रति,
प्रमुख सचिव
म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग
मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल

विषयः- जिला एवं जनपद पंचायत अन्तर्गत कार्यरत अध्यापक संवर्ग को अनुग्रह राशि अधिकत्तम 50 हजार दिये जाने के सम्बंध में।

सन्दर्भः-म.प्र.शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय, भोपाल का पत्र क्र/एफ/4-145/2016/18-1 भोपाल दिनांक 31/8/2016

महोदय,
विषयांकित सन्दर्भानुसार उल्लेख है कि म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 1-10/2005/20-1 दिनांक 23/12/2005 द्वारा शिक्षाकर्मियों को अनुग्रह राशि रूपये 25,000.00 देने के सम्बंध में आदेश पूर्व से हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्र एफ,1-54/09/20-1 दिनांक 13/10/2006 के द्वारा शिक्षाकर्मियों को देय अनुग्रह राशि के आदेश अध्यापक संवर्ग को यथावत लागू करने के आदेश हैं।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सन्दर्भित आदेश के द्वारा नगरीय निकाय में कार्यरत अध्यापक संवर्ग की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को अनुग्रह राशि की सीमा रू.25,000.00 से बढ़ाकर अधिकत्तम रूपये 50,000,00 की अनुमति 1/4/2016 से प्रदान की गई है। बावजूद इसके जिला एवं जनपद पंचायतों के अधीन कार्यरत अध्यापकों को अभी भी अधिकत्तम राशि रू.25,000,00 ही दिये जा रहें हैं इस सम्बंध राशि बढ़ाने हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किये गये हैं।

तत्सम्बंध में आग्रह है कि जिला एवं जनपद पंचायतों के अधीन कार्यरत अध्यापकों को भी अनुग्रह राशि रू.50,000.00 1/4/2016 से दिये जाने के आदेश जारी किये जायें। यदि 15 दिवस के अन्दर आदेश जारी नहीं किये जाते हैं तो संघ समानता का  अधिकार के उल्लघंन को लेकर न्यायालय जाने के लिये बाध्य होगा। 
      
(डी.के.सिंगौर)
क्र./डी./2016/311 मण्डला,दिनांक-..5/11/2016

प्रतिलिपिः-
प्रमुख सचिव म.प्र.शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल।
आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल।


Saturday, November 5, 2016

सामाजिक और नैतिक पतन रोकने के लिए व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का समावेश आवश्यक है -सुरेश यादव(रतलाम)

सुरेश यादव(रतलाम)- महाराष्ट्र के बुलढाणा में छात्रावास की मासूम बालिकाओ से शारीरिक शोषण का मामला सामने आया है ,इसमें शिक्षकों पर ही शोषण के आरोप लगाये गये हैं । 2 वर्ष पूर्व बस्तर में भी ऐसी ही एक घटना सामने आयी थी जँहा छात्रावास के शिक्षकों पर ही बच्चियों कें शारीरिक शोषण के आरोप लगाए गए थे ।
        5 नवम्बर  को ही रतलाम के जावरा में 9 वीं कक्षा के एक छात्र द्वारा ,विद्यालय कि गणवेश नहीं पहनने पर शिक्षक की फटकार के  चलते शिक्षक को गोली मार दी गयी । कुछ दिनों पहले दिल्ली में स्कूली छात्रों द्वारा होमवर्क नहीं करने पर शिक्षक की फटकार के चलते अपने शिक्षक की हत्या कर दी गयी थी ।
          उक्त घटनाक्रम ने ,न सिर्फ गुरु शिष्य के रिश्तों पर प्रश्न चिन्ह लगाया है । मानवीय सम्बंधो और संवेदनाओं को भी तार तार किया है।
          दूसरी तरफ
         
          लगभग 2 माह पूर्व की एक घटना में रतलाम की एक बच्ची ने अपने पिता द्वारा शारीरिक शोषण की  घटना अपने परिजनों को नहीं बता कर सीधे शिक्षकों को बताई ।  उत्तर प्रदेश के एक गाँव में अपने शिक्षक के स्थान्तरण पर बच्चों का फुट फुट कर रोना हम सोश्यल मिडिया पर देख चुके है । बाद में शिक्षक दिवस के अवसर पर  रवीश कुमार ने अपने कार्यक्रम में उसी विद्यालय और गाँव की रिपोर्ट भी प्रसारित की थी।
          इन घटनाओ में  बच्चो का शिक्षक के प्रति प्रेम और विश्वास नजर आता है ।
      लेंकिन संपूर्ण परिदृश्य एक  समान नही है । बच्चे घर के अतिरिक्त सबसे अधिक समय विद्यालयो में ही व्यतीत करते है, और वे अपने पालकों के अतिरिक्त सबसे अधिक विश्वास शिक्षक पर ही करते है ।
       आज का युग इंस्टेंट युग है,हम हर काम का त्वरित परिणाम चाहते है ,बच्चों पर पलकों द्वारा सफलता के लिए भारी दबाव बनाया जाता  है , बच्चे मानसिक रूप से मजबूत नहीं हो पा रहे है, उनका बचपन खो गया है , उनमे कई मानसिक विकार उतपन्न हो रहे हैं ।
        हम सिर्फ भौतिक ,व्यावसायिक और आर्थिक सफलता को ही सफल जीवन का पैमाना  मान रहे है । समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों  के आधार पर सफलता का आकलन नहीं किया जाता इस लिए इनका अवमूल्यन हो रहा है ।
         वेदों और शास्त्रों में गुरु को ईश्वर प्राप्ति का मार्गदर्शक बताया गया है यही नहीं गुरु की तुलना ईश्वर से भी की गयी है । तो रामायण के किषकिन्धा कांड में गुरु शिष्य के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए ,गुरु को पिता के समान और शिष्य को पुत्र-पुत्री के समान कहा गया है ।
       इतनी समृद्ध परम्पराओ और उच्च नैतिक मूल्यों वाले समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों का पतन चिंता का विषय है । इस लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का समावेश अत्यावश्यक हो गया है । शिक्षा से जुड़े हर तबके को इस विषय में गंभीर चिंतन करना चाहिए ।
    (लेखक सव्य अध्यापक है और यह उनके निजी विचार है )

अनुदान प्राप्त विद्यालयो में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग में ,संविलियन और अध्य्यापक संवर्ग के समान वेतन मान प्रदान करने का आदेश

प्रदेश के अनुदान प्राप्त विद्यालयो में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग में ,संविलियन और अध्य्यापक संवर्ग के समान वेतन मान प्रदान करने का आदेश जारी किया गया है । राज्य शासन ने यह आदेश ,उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में जारी किया है ।

 प्रकरण इस प्रकार था ," प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयो में वर्ष 1998 से 1 अप्रैल 2000 तक 107 शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति की गयी थी ।जिन्हें अभी तक अध्यापक भी नहीं बनाया गया था । जबलपुर निवासी रूपंजाली पिटर व अन्य ने वर्ष 2011 में उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर अध्यापक के समान वेतंन प्रदान करने की मांग की ,न्यायालय ने अध्यापक के समान वेतन और सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया गया ।शासन ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ,में पुनरीक्षण याचिका दायर की परंतु वह खारिज कर दी गयी। अब  राज्य शासन ने इन 93 शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग के समान वेतन और सुविधाएँ प्रदान करने का आदेश जारी किया है । आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इन लिंक को ओपन करें

 इसी प्रकार गत वर्ष भी राज्य शासन ने कुछ निजी विद्यालयों (उक्त विद्यालय को शासकीय विद्यालय बनाया जा चूका था ) में कार्यरत शिक्षा कर्मियों और अन्य स्टाफ का शिक्षा विभाग में संविलियन कर शिक्षक और अन्य की भाँती वेतन और सुविधाएं प्रादन करने के आदेश जारी किये  थे ।इस प्रकरण का अध्ययन करने और समझने के लिए आप इस लिंक को ओपन कर के आदेश और लेख देख सकते हैं।



शासनाधीन कि‍ए गए 22 वि‍द्यालयों में शि‍क्षाकर्मी/जि‍लाध्‍यक्ष दर/अंशकालीन दर पर स्‍वीकृत पदों के स्‍थान पर नि‍यमि‍त पद स्‍वीकृत कि‍ए जाने संबंधी 18 जून 2015

18 जून 2015 को जारी स्कूल शिक्षा मंत्रालय का आदेश यह कह कर प्रचारित किया जा रहा है। प्रदेश के 22 विद्यालयो के शिक्षा कर्मीयो को 1998 से शिक्षा विभाग में समिलित कर के एरियर भी दिया जा रहा है। कई लोग तो संगठनो के नाम से बधाई सन्देश भी जारी करने लगे ।

यह बात बिलकुल सही है की शिक्षाकर्मी साथियो का ही ,शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है लेकिन यह एक अर्ध सत्य है।पुरे मामले की वास्तविकता कुछ और ही है।


सम्पूर्ण प्रकरण की स्थिति यह है की प्रदेश के 22 निजी /(अशासकीय या प्रायवेट ) विद्यालयो को शासन ने ,1998 से 2001 तक अपने अधीन लिया 1995 की निति के अनुसार । इसके बाद शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षाकर्मी के समान और अन्य तृतीय - तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिलाधीश दर से वेतन दिया जाने लगा ( क्लेरिकल काम करने वाले हमारे साथी जिलाधीश दर को अच्छी तरह से समझते होंगे )


जबकि 1995 की अधिग्रहण निति के अनुसार सम्पूर्ण शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक ,शिक्षक,व्यख्याता ) के सामान और अन्य कर्मचारियों को तृतीय - चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के समान वेतन भत्तों और अन्य सुविधाओं की पत्राता थी। परंतु शासन ने शिक्षको को शिक्षाकर्मी और तृतीय चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियो अंशकालिक के रूप में जिलाधिश दर प्रदान की । 


इस से क्षुब्ध हो कर वँहा के स्टाफ ने न्यायालय की शरण ली । न्ययालय ने 1995 की निति का पालन करने के निर्देश दिए ।परंतु शासन ने 2 बार अपील की जो ख़ारिज हो गयी ,अंततोगत्वा शासन ने अपनी गलती मानकर 1995 की निति का पालन किया है।व इन 22 निजी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ को अधिग्रहण की दिनांक से शिक्षक संवर्ग के समान (प्रधान्ध्यापक /प्राचार्य को छोड़कर ),व अन्य स्टाफ को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामान वेतन व भत्ते प्रादान कर दिये है व पूर्व बकाया का एरियर 5 सामान वर्षिक किश्तों में प्रदान कर दिया है। अन्य सुविधाएं भी प्रदान कर दी गयी है।


वास्तविकता यह है की ये शिक्षा कर्मी साथी हमारे साथ व् हमारे नियमो के अंतर्गत भर्ती शिक्षा कर्मी नाही है ,हो सकता है यंहा कार्यरत कर्मचारी 1995 से पूर्व कार्यरत हों । 
और अधिक जानकारी इन जिलो में कार्यरत हमारे साथी भली भाँति दे सकते है।में स्वयं मेरी जानकारी का उदाहरण देता हूँ में खातेगांव जिला देवास का मूल निवासी हूँ ,वँहा पर ठाकुर सावदेकर राव निजी महाविद्यालय था इसका अधिग्रहण शासन ने 1989 में किया और वँहा पर कार्यरत स्टाफ सहायक प्राध्यापक सहित को शासकिय अधिकारी कर्मचारी के रूप में वेतन भत्ते व सुविधाएं दी जाने लगी।

साथियो आज कल सोशल मिडिया का जामाना है अफवाहें बड़ी तेजी से फैलती है। हम शिक्षक है समाज के जिम्मेदार नगरिको में गणना होती है। कम से कम हम तो अफवाह न फैलाएं । मेरा दावा है की यदि हम इस आदेश को ही एक बार ढंग से पढ़ लें तो सम्पूर्ण स्थिति साफ हो जाती।
सुरेश यादव ,कार्यकारी जिलाध्यक्ष ,राज्य अध्यापक संघ रतलाम 9926809650

आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें








शासनाधीन कि‍ए गए 22 वि‍द्यालयों में शि‍क्षाकर्मी/जि‍लाध्‍यक्ष दर/अंशकालीन दर पर स्‍वीकृत पदों के स्‍थान पर नि‍यमि‍त पद स्‍वीकृत कि‍ए जाने संबंधी 18 जून 2015

18 जून 2015 को जारी स्कूल शिक्षा मंत्रालय का आदेश यह कह कर प्रचारित किया जा रहा है। प्रदेश के 22 विद्यालयो के शिक्षा कर्मीयो को 1998 से शिक्षा विभाग में समिलित कर के एरियर भी दिया जा रहा है। कई लोग तो संगठनो के नाम से बधाई सन्देश भी जारी करने लगे ।

यह बात बिलकुल सही है की शिक्षाकर्मी साथियो का ही ,शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है लेकिन यह एक अर्ध सत्य है।पुरे मामले की वास्तविकता कुछ और ही है।


सम्पूर्ण प्रकरण की स्थिति यह है की प्रदेश के 22 निजी /(अशासकीय या प्रायवेट ) विद्यालयो को शासन ने ,1998 से 2001 तक अपने अधीन लिया 1995 की निति के अनुसार । इसके बाद शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षाकर्मी के समान और अन्य तृतीय - तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिलाधीश दर से वेतन दिया जाने लगा ( क्लेरिकल काम करने वाले हमारे साथी जिलाधीश दर को अच्छी तरह से समझते होंगे )


जबकि 1995 की अधिग्रहण निति के अनुसार सम्पूर्ण शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक ,शिक्षक,व्यख्याता ) के सामान और अन्य कर्मचारियों को तृतीय - चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के समान वेतन भत्तों और अन्य सुविधाओं की पत्राता थी। परंतु शासन ने शिक्षको को शिक्षाकर्मी और तृतीय चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियो अंशकालिक के रूप में जिलाधिश दर प्रदान की । 


इस से क्षुब्ध हो कर वँहा के स्टाफ ने न्यायालय की शरण ली । न्ययालय ने 1995 की निति का पालन करने के निर्देश दिए ।परंतु शासन ने 2 बार अपील की जो ख़ारिज हो गयी ,अंततोगत्वा शासन ने अपनी गलती मानकर 1995 की निति का पालन किया है।व इन 22 निजी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ को अधिग्रहण की दिनांक से शिक्षक संवर्ग के समान (प्रधान्ध्यापक /प्राचार्य को छोड़कर ),व अन्य स्टाफ को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामान वेतन व भत्ते प्रादान कर दिये है व पूर्व बकाया का एरियर 5 सामान वर्षिक किश्तों में प्रदान कर दिया है। अन्य सुविधाएं भी प्रदान कर दी गयी है।


वास्तविकता यह है की ये शिक्षा कर्मी साथी हमारे साथ व् हमारे नियमो के अंतर्गत भर्ती शिक्षा कर्मी नाही है ,हो सकता है यंहा कार्यरत कर्मचारी 1995 से पूर्व कार्यरत हों । 
और अधिक जानकारी इन जिलो में कार्यरत हमारे साथी भली भाँति दे सकते है।में स्वयं मेरी जानकारी का उदाहरण देता हूँ में खातेगांव जिला देवास का मूल निवासी हूँ ,वँहा पर ठाकुर सावदेकर राव निजी महाविद्यालय था इसका अधिग्रहण शासन ने 1989 में किया और वँहा पर कार्यरत स्टाफ सहायक प्राध्यापक सहित को शासकिय अधिकारी कर्मचारी के रूप में वेतन भत्ते व सुविधाएं दी जाने लगी।

साथियो आज कल सोशल मिडिया का जामाना है अफवाहें बड़ी तेजी से फैलती है। हम शिक्षक है समाज के जिम्मेदार नगरिको में गणना होती है। कम से कम हम तो अफवाह न फैलाएं । मेरा दावा है की यदि हम इस आदेश को ही एक बार ढंग से पढ़ लें तो सम्पूर्ण स्थिति साफ हो जाती।
सुरेश यादव ,कार्यकारी जिलाध्यक्ष ,राज्य अध्यापक संघ रतलाम 9926809650

आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें








Friday, November 4, 2016

पुलिस की बर्बरता की कहानी - थाने में कपड़े उतरवाए, जूते चटवाए झूठा केस लगाकर दो मोबाइल व रुपए छीने ,सहायक अध्यापक ने दुखी होकर आत्महत्या कर ली

शिवपुरी/भोपाल. मध्य प्रदेश में एक गवर्नमेंट टीचर ( सहायक अध्यापक ) ने पुलिस की बदसलूकी की वजह से सुसाइड कर लिया। सहायक अध्यापक मनोज कुमार पुरोहित ने सीएम के नाम एक नोट भी छोड़ा है, जिसमें खुद के साथ बर्बरता का जिक्र है। इस नोट में मनोज ने पुलिस पर कपड़े उतरवाने, जूते चटवाने और झूठा केस लगाने जैसे आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट...सोश्यल मिडिया में वायरल हो गए हैं। 

 मनोज पुरोहित 29 अक्टूबर को जुआ एक्ट में अरेस्ट किए गए थे। सुसाइड नोट के मुताबिक इस दौरान उनके साथ बर्बरता हुई।
- उन्होंने सुसाइड से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान, कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, एसपी मोहम्मद युसुफ कुरैशी, अपने दो भाइयों, पिता व मां के नाम अलग-अलग लेटर लिखे।

पढ़िए मनोज का  मुख्यमंत्री के नाम पत्र 
श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय, 
मप्र शासन भोपाल 
सादर प्रणाम 

मैं मनोज कुमार पुरोहित सहायक अध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय शाजापुर में पदस्थ हूं। आज दिनांक 29 अक्टूबर 2016 को पुलिस थाना पिछोर के एसआई अरूण प्रताप सिंह भदौरिया, एएसआई जेपी पाराशर, दीवान शर्मा एवं दीवान जादौन, सिपाही रिंकू शाक्य ने मेरी बेइज्जती की। केबल इसलिए कि मेरे बड़े भाई एवं भांजे की बस चलती है, जिसे मैं कभी-कभी देख लेता था छुट्टी के दिन। मैंने पुलिस को पैसे देने से मना किया तो मेरे ऊपर दो जुआ एक्ट झूठे लगा रखे हैं। मैंने इस बात का विरोध किया तो मेरे ऊपर हथियार जैसे कट्टा, पिस्टल आदि लगाने की धमकी दी और कहा कि घर से रुपए मंगाओं एक लाख, तब ही तुम्हारी जमानत ले सकते हैं। मेरे साथ कुछ और लड़के भी बंद थे, उनसे भी पूछा जाए मेरी बेइज्जती की गई। मेरे बांये हाथ में टोनी के पास पट्‌टा मारा है एसआई अरुण प्रताप ने। मेरे गाल पर रिंकू सिपाही ने मारा है। कम से कम 10 चांटा और लात घूंसे मारे हैं। मैंने पुलिस से कहा कि मैं कोई आपराधिक प्रवृति का इंसान नहीं हूं तो जवाब दिया कि हमने तुम्हें अपराधी बना दिया है। अगर ज्यादा बोलोगे और बड़ा अपराधी बना देंगे। तुम पर पहले से एक जुआ एक्ट लगा है, जिसकी तुम तारीख कर रहे हो। ऐसे ही जेल भेज देंगे। मेरी जेब से वेतन निकाल ली। मेरे साथ पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं रहा मेरे पास सेमसंग मोबाइल जे-7 एवं लावा का मोबाइल नंबर 9425449013, 9620552340, 9575892725 की सिम डली हुई थी, उसे भी पु़लिस ने रख लिया है। इसी प्रकार कलेक्टर को लिखे पत्र में शिक्षक ने कहा कि मैं पुलिस की मनमानी और तानाशाही से दु:खी होकर आत्महत्या कर रहा हूं। एसआई अरुण प्रताप सिंह भदौरिया, एएसआई पाराशर, दीवान शर्मा, दीवान जादौन व सिपाही रिंकू ने मेरी बेइज्जती की है। थाने में मेरे कपड़े उतारे गए, रिंकू ने मुझमें चांटे मारे, एसआई भदौरिया ने पट्टे मारे, जूते मारे और जूते चटवाए और 1 लाख 50 हजार रुपए की मांग की। इसमें एक पत्रकार सचिन भट्ट उर्फ मोनू भी शामिल है। 

मनोज कुमार पुरोहित  



बेटे की मौत के जिम्मेदारों को बर्खास्त करे सरकार 


29 अक्टूबर को मेरे पुत्र मनोज को पुलिस जुआ एक्ट में झूठा फंसाने थाने ले गई थी। जहां उसकी निर्दयता से पिटाई की। अपमानित कर संगीन अपराधों में मुलजिम बनाने की धमकी देते हुए 25 हजार रुपए घर से उसे छुड़वाने के पुलिस ने लिए। साथ ही उसके दोनों मोबाइल भी छीन लिए। मारपीट करने व अपमानित होने से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। दु:खी होकर उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सरकार को दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। 

नारायण दास पुरोहित, मृत शिक्षक के पिता 

- इस मामले में टीचर के पिता नारायणदास पुरोहित ने कहा, "पुलिस की बर्बरता से अपमानित होने की वजह से उनके बेटे का मानसिक संतुलन बिगड़ गया।"
- "दुखी होकर उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सरकार को दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।"


6 लोगों पर की थी जुआ एक्ट में कार्रवाई

-जानकारी के मुताबिक पुलिस ने 29 अक्टूबर को शाजापुर स्कूल के टीचर मनोज समेत 6 लोगों पर जुआ एक्ट के तहत कारवाई की थी।
- पुलिस का दावा है कि आरोपियों से 35 हजार 40 रुपए जब्त किए गए थे। गिरफ्तार होने के बाद आरोपियों ने पुलिस पर थाने में मारपीट करने का आरोप लगाया था।


अन्य  लेटर में लिखा : मुझे माफ करना...कोई रोना मत, नैतिक चेष्ठा को समझना...

- मनोज ने भाई और पिता नारायणदास पुरोहित, मां और भाभी को लिखे लेटर में कहा, "मेरा निवेदन है कि मेरे दोनों बच्चे और पत्नी रूबी का ध्यान रखें। मैं उन्हें आप सभी के हवाले छोड़कर जा रहा हूं।"
- "सुरेश राजपूत, शारदा राजपूत आप भी मेरे बच्चों का ख्याल रखें। मेरी पत्नी रूबी को मेरा कहना है कि तुम इन सभी की बात मानना।"
- "अगर बच्चों का भविष्य बनाना है तो मेरी आखिरी बात यही है कि मेरे दोनों भाई तुम्हारे पिता के समान हैं। सभी से हाथ जोड़कर क्षमा चाहता हूं कि अपनी बेइज्जती की वजह से में यह कदम उठा रहा हूं।"
- "रजनी भाभी, मुझे माफ करना, दादा मुझे क्षमा करना, मैं आप सभी को छोड़कर जा रहा हूं। कोई रोना मत। नैतिक चेष्ठा को समझना, सभी खुश रहें।"

स्त्रोत दैनिक भास्कर 

MP के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा अब NCERT का सिलेबस ,अध्यापक संघर्ष समिति की 21 सूत्रीय मांग में था यह मुद्दा

भोपाल. पहली कक्षा से 11वीं तक के छात्र-छात्राएं भी अब नेशनल काउंसिल ऑफ एजूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की किताबें पढ़ेंगे। राज्य सरकार नए सत्र से 8वीं, 10वीं और 12वीं की बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं के गणित, विज्ञान और पर्यावरण के विषयों में एनसीईआरटी सिलेबस लागू करने जा रही है। बोर्ड कक्षाओं में इसे बाद में लागू किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग इसे जल्द ही कैबिनेट में लाने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि नए सत्र के लिए किताबों की छपाई का काम होना है। प्रदेश में स्कूली बच्चों को मुफ्त में किताबें दी जाती हैं। लिहाजा एनसीईआरटी से सिलेबस लेने के बाद उसकी छपाई का काम पाठ्यपुस्तक निगम से कराया जाएगा। अभी निजी स्कूल सीबीएसई के तहत एनसीईआरटी से ही मान्य किताबें इस्तेमाल करते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 1.30 करोड़ है। इसमें से 50 लाख के करीब विद्यार्थियों को राज्य सरकार मुफ्त किताबें उपलब्ध कराती है।

शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगामुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगा। साथ ही मप्र के बच्चों का राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता का प्रतिशत बढ़ेगा। अगले सत्र से एनसीईआरटी की किताबें लागू हो जाएंगी।दीपक जोशी, राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा



1998 के अध्यापको को छटे वेतनमान में 01 अप्रैल 2007 से तीन वेतनवृद्धियों का लाभ मिलेगा कोषालय में सहमति बनी -अरविन्द रावल झाबुआ

अरविन्द रावल झाबुआ-1998 में नियुक्त शिक्षाकर्मी यानि अध्यापको का छटे वेतनमान के गणना पत्रक के अनुसार 01 अप्रैल 2007 से तीन वेतनवृद्धियों का लाभ देकर की जाएगी ! हमारी टीम द्धारा कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद वरिष्ठ स्तर के अधिकारियो और लेखापालो ने आज हमारे द्धारा बनाये गये गणना पत्रक को सही ठहराते हुए वेतन निर्धारण करवाने पर सहमति प्रदान की हे ! हमारा सभी जिलो के अध्यापको से अनुरोध हे कि वे सभी हमारे द्धारा बनाई गई सारणी के अनुसार गणना कर अध्यापक सवर्ग का वेतन निर्धारण करवाये और अपने अपने संभाग की स्थानीय संपरीक्षा निधि कार्यालय से उक्त गणना पत्रक को पारित करवाये !




Comments system

Friday, November 11, 2016

अध्यापको के वेतन को लेकर सह्याक संचालक संपरीक्षा निधि ने संचालक संपरीक्षा निधि से मांगा मार्गदर्शन,पत्र ब्लॉग में


6वे वेतनमान के आदेश में वेतन निर्धारण का कोई फॉर्मूला ही नहीँ
स्थानीय संपरिक्षा निधि जबलपुर ने अध्यापकों के छठवें वेतन मान में निकाली 7 खामियां 8वी खामी पर भी उनकी नज़र थी पर जाने क्यों छुपा लिया । नये वेतनमान निर्धारण में स्थानीय संपरिक्षा निधि से अनुमोदन ज़रूरी है यदि ये बिना मार्गदर्शन के अनुमोदन नहीँ करेंगे तो अब शासन का मार्गदर्शन ज़रूर जारी होगा और बिन्दुवार होगा....यही हमारी 4 दिन तक स्थानीय संपरिक्षा निधि में चक्कर काटने   की  सफलता है । गौर करने की बात है कि स्थानीय संपरिक्षा निधि जबलपुर ने वेतन निर्धारण के मूल आधार पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया है यहाँ तक कह दिया है कि ऑर्डर में वेतन निर्धारण का कोई फॉर्मूला ही नहीँ है इससे साफ जाहिर होता है कि यदि कोई वेतन निर्धारण करता भी है तो वह मनगढ़ंत ही होगा । स्थानीय संपरिक्षा निधि ने सेवा काल की गणना 2007 से करने को गम्भीरता से लिया  है जिसके चलते मिली हुई क्रमोन्न्ती पर भी प्रश्न खड़ा हो गया है । कुल मिलाकर लगता नहीँ ये गणना पत्रक कुछ लाभ देने की नियत से बनाया गया है । यदि जल्दी और सार्थक मार्ग दर्शन नहीँ मिला तो पूरे प्रदेश में जितने जिले हैं उतने ही तरह के वेतन निर्धारण देखने को मिलेगा ।
डी के सिंगौर

Thursday, November 10, 2016

कूटनीति कर के अध्यापको के वेतन को वेतन में उलझा दिया सरकार ने - अजितपाल यादव (भोपाल)

       बेहद सरल कूटनीति होती है की अगर कोई संवर्ग मूल हक की और ध्यान केन्द्रित करने लगे तो उसे आर्थिक मामलों पर उलझा दो । और हुआ भी यही । अभी जैसे ही सरकार को लगा कि अरे ये संघर्ष समिति ने कैसा ज्ञापन दे दिया?  अरे ये तो मूल समस्याों को पकड़ रहे हैं । रोको रोको इनको ।
बस यहीं से शाकएब्जार्वर्स  का काम शुरू हुआ और स्वागत रूपी सम्मेलन और सम्मोहन  पर जाकर खत्म हुआ । दूसरी तरफ बड़ा वर्ग नाना प्रकार की गणना की टेबल, कुर्सी, सोफा में उलझा रहा और अपने ज्ञान का लोहा मनवाता रहा ।
         आप देखना की नवंबर माह के समाप्त होते होते बहुत कुछ जादूगरी हमें समझ आने वाली है  और ये समझ आते ही हम फिर खुद को भयंकर रूप से ठगा महसूस करेंगे । और फिर वही आर्थिक मामलों पर पूरा ध्यान अटक जाएगा ।

    एक अधिकारी से चर्चा का सार :-
(1)अंतरिम राहत किश्तों की वसूली (समायोजन) 2013 से होगी
(2) क्रमोन्नति प्राप्त को अगला वेतन बैंड नहीं मिलेगा
(3) सहायक अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक क 3 प्रतिशत की वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी

           ये गणना पत्रक की भाषा अनुसार बताया गया है । इसके अलावा उनके द्वारा स्पष्ट किया गया की अब ये सारी विसंगतियाँ नगरीय व ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग दूर करेगा । क्योंकि वित्त विभाग नियमित कर्मचारी के लिए स्पष्ट करता है और अध्यापक कर्मचारी नहीं है ।
           मेरा अनुमान है की एक बार फिर हमें बजट सत्र मार्च 2017 तक के लिए अटका दिया गया है और इस बार तो डाबर जन्मघुट्टी पिला कर घर भेजा गया है । मेरा सभी से अनुरोध है की सभी संघों से ऐसे शाकएब्जार्वर्स को निकाल बाहर किया जाए जो हमारे हितों के विरूद्ध शतरंज की बिसात बिछाते हैं और हमें मोहरों के रूप में इस्तेमाल करते हैं ।
    

जबलपुर में स्थानीय निधि संपरीक्षा ने नहीं किया अध्यापको के वेतन का अनुमोदन ,अध्यापकों को बैरंग लौटा दिया।

डीके सिंगोर/मंडला। अध्यापक संवर्ग को जनवरी 2016 से मिलने वाले 6पे के गणना पत्रक के आदेश को सरकार ने 10 महीने बाद जारी तो कर दिया और अनेक संकुलों मे नया वेतनमान आदेश मिल भी गया परंतु सही वेतन के निर्धारण का दायित्व निभाने की जिम्मेदारी जिस संपरीक्षा निधि कार्यालय को सौपी गई वह ,ही गणना पत्रक को समझ नहीं पा रहा है।
         जबलपुर संभाग के जिलों से सही निर्धारण कराने संपरीक्षा निधि कार्यालय जबलपुर ने अध्यापकों के गणना पत्रक के सम्बन्ध मे एक मार्गदर्शन पत्र जारी कर अध्यापकों को बैरंग लौटा दिया।

कहाँ हो रही कठिनाई
संपरीक्षा निधि कार्यालय मे विगत 5 दिनों से वेतन निर्धारण का अनुमोदन कराने जा रहे अध्यापक संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष डी के सिंगौर और नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि संपरीक्षा के अधिकारी निम्न कठिनाइयों को बता रहे है-
1-सहायक अध्यापक,अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक की वेतन तालिका एक समान नियमों से नहीं बनी।
2-आदेश मे 2.1 और 2.3 मे वेतन निर्धारण को लेकर विरोधाभास है।
3-3000 -5000 वेतनमान वाले सहायक अध्यापक को क्रमोन्नति 3500-6000 के वेतनमान पर हुई जबकि तालिका मे 4000 रु का वेतनमान दिया गया है।
4-यही स्थिति क्रमोन्नत हुए अध्यापक के साथ है जारी तालिका मे उसका तदस्थानिक मूल वेतन तालिका से या तो मेल नहीं खाता या  कम है।
5-क्रमोन्नत वरिष्ठ अध्यापक के ग्रेड पे को 3600 से 4200 करने पर 4200 ग्रेड पे की तालिका ही आदेश मे मौजूद नहीं है।
6-यदि अध्यापक संवर्ग के तदस्थानिक वेतनमान के अनुरूप वेतन निर्धारण किया जाए तो एक साथ नियुक्त एक अध्यापक और अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक पद के वेतनमान मे पदोन्नति प्राप्त अध्यापक का वेतन गैर पदोन्नत या क्रमोन्नत अध्यापक से कम हो रहा है।
7. वेतन निर्धारण के लिये एक भी उदाहरण प्रारूप जारी नहीँ किया गया है वेतन निर्धारण को लेकर अध्यापक संकुल प्राचार्य से लेकर डी ई ओ और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे है
       लेकिन क्षेत्रीय स्थानीय निधि सम्परीक्षक  जिनका अनुमोदन अनिवार्य है के द्वारा स्पष्ट नियमों के अभाव में अनुमोदन नहीँ किये जाने से  अध्यापक एक बार फिर भोपाल की ओर रुख कर दिया है अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अब वे संपरीक्षा निधि कार्यालय से प्राप्त मार्गदर्शन को लेकर DPI जाएंगे।

झबुआ का वेतंन निर्रधारण ,जिसके लिये कोषालय से सहमति मिली है ,वेतन निर्द्धारण पत्रक,अंडर टेकिंग,कार्यालयीन आदेश ,सेवा पुस्तिका ,विकल्प - अरविन्द रावल

      
अरविन्द रावल - मध्यप्रदेश में पहली बार आधिकारिक रूप से अध्यापक सवर्ग को देय छठे वेतनमान का वेतन निर्धारण झाबुआ जिले के शासकीय हाई स्कुल करडावद बड़ी के प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव एवम् लेखापाल शिक्षक श्री योगेन्द्र दीक्षित द्वारा अध्यापक अरविंद रावल का आज किया गया। छटे वेतनमान का सबसे पहले वेतन निर्धारण करने पर जिले के समस्त अध्यापको की और से प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव एव लेखापाल शिक्षक श्री योगेन्द्र दीक्षित का आभार व्यक्त किया गया और धन्यवाद ज्ञापित किया ।
             जिले के हम अध्यापक  साथी फ़िरोज़ खान, शरद गुप्ता, इलियास खान, मनीष पवार और मेरे द्धारा संशोधित गणना पत्रक जारी होने की दिनांक से ही इस पर अध्ययन करने लगे और जिले में एक समान रूप से वेतन निर्धारण हो सके इस उद्देश्य को लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारियो और लेखापालों से उक्त आदेश की हर तरह से व्याख्या कर समझाया गया ! हमने रतलाम के भाई सुरेश यादवजी से भी सही गणना पत्रक बनाने में सहयोग लिया ! पन्द्रह दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद हम साथियो दिन रात एक कर ने फाइनल एक टेबल बनाई जिसे जिले के अधिकारियो और लेखापालों द्धारा समझा गया ! हमारे बड़ेभाई स्वरुप श्री जफ़र खान वरिष्ठ लेखापाल द्धारा हमारे द्धारा बनाये गए गणना पत्रक सबसे पहले अध्ययन कर सहमति दी और उन्ही के नेतृत्व में हम सभी ने जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियो के साथ कई घण्टो की मैराथन बैठक करने बाद हमारे द्धारा बनाई गई तालिका के अनुसार झाबुआ जिले के अध्यापको का एक समान वेतन निर्धारण करने पर सहमति प्रदान की हे ! उसी परिपेक्ष्य में हाई  स्कुल करडावद बड़ी के प्राचार्य श्री एस एल श्रीवास्तव द्धारा न सिर्फ जिले में बल्कि प्रदेश सबसे पहले  अधिनस्त अध्यापको का नियमानुसार वेतन निर्धारण कर दिया गया हे और अध्यापको की सर्विस बुक अवलोकन हेतु संपरीक्षा निधि कार्यालय इंदौर भेजी जा रही हे !
           हम साथियो द्धारा बनाये गए गणना पत्रक को प्रदेश के सभी जिलो  द्धारा पसन्द किया गया हे और करीब चालीस से ज्यादा जिलो में हमारे द्धारा बनाई गई सारणी के अनुसार ही वेतन निर्धारण करने का कार्य किया जा रहा हे ! झाबुआ जिले में अध्यापको का छठा वेतनमान एक समान निर्धारण करवाने की कार्यवाही करने के लिए सहायक आयुक्त महोदय, जिला कोषालय अधिकारी महोदय  और वरिष्ठ लेखापाल जफ़र खान सर का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा हे ! हम एक बार फिर झाबुआ जिले  अध्यापको की और से छठे वेतनमान के निर्धारण करवाने पर सहयोग करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारियों के प्रति आभार प्रकट करते हे !
    








आज एक समस्या से खुद रूबरू हुआ - अजित पाल यादव (भोपाल)

आज एक समस्या से खुद रूबरू हुआ ।
एक तरफ तो मुखिया जी कहते हैं की इतना पढाओ की निजी स्कूलों में ताले लग जाएं और दूसरी तरफ जिला शिक्षा अधिकारी मुखिया की सोच की धज्जियां उड़ा देते हैं ।
बात है किसी भी शासकीय आदेश की गलत व्याख्या करने की ।
अभी एक आदेश निकला था मूल पदसंरचना का। जिसमें किसी भी शाला हेतु शिक्षकों की नियुक्ति की अवधारणा को स्पष्ट करने की व्याख्या की थी । पर आज मैंने खुद उसकी धज्जियां उढ़ते देखी ।
आदेश के अनुसार विज्ञान समूह से गणित, कला से सामाजिक विज्ञान और भाषा से अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई है । पर आप ये बताओ की जहाँ इनमें से एक भी न हो और वो स्कूल 1967 से संचालित हो तो क्या कहोगे?  और तुक्का ये की नियम नहीं है । मतलब ये हुआ की शाला को और विद्यार्थी को यतीम कर दो । खुद ही अशासकीय में पहुँच जाएगा ।
ये समस्या सबको आनी है । इसलिए चैन से सोना है तो जाग जाओ । और मामा को स्वागत के अलावा जमीनी हकीकत बताओ ।
संघर्ष समिति जिंदाबाद ।
अध्यापक एकता जिंदाबाद ।
(लेखक स्वयं अध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं)

आखिर क्यों सरकारी स्कूल खतरे में ?- अजित पाल यादव (भोपाल)


 अजित पाल यादव -  यदि हम ग्रामीण क्षेत्रों पर नजर डालें तो विगत 3 वर्षें में बहुत तेज गति से अशासकीय शालाओं को मान्यता प्रदान की गई है । ये निजी शालाएं आर टी इ के अंतर्गत नि:शुल्क शिक्षा के नाम पर सरकारी विद्यालयों से लगभग शतप्रतिशत सवर्ण विद्यार्थियो को खींच चुकी हैं । अब केवल पिछड़ी और अनुसूचित जाति व जनजाति के ही बच्चे बचे हैं । यदि आप मेरी बात से असहमत हों तो कृपया टिप्पणी अवश्य करें । यही स्थिति रही तो आने वाले 5-6 वर्षों में बहुत अधिक शालाओं में 10 से कम दर्ज संख्या होने वाली है । और ये शाला समाप्ति का मार्ग है ।
       शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षक पदसंरचना का यदि अध्ययन करेंगे तो ये भी ताबूत में ठुकती कील नजर आएगी । अभी 14.09.16 को म प्र शासन द्वारा पुनः आदेश जारी किया है जिसमें विषयवार वरियता जारी की है । कृपया आप सभी आदेश प्राप्त कर अध्यापक करें । यदि गणित, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान का शिक्षक नहीं भी है तो शालाओं को खाली रखा जाएगा पर हिंदी, विज्ञान संस्कृत के शिक्षक की पदस्थापना नहीं की जाएगी ।

 ये स्थिति 140 की दर्ज संख्या पर लागू कर दी गई है ।

भयावह स्थिति :-
घटती दर्ज संख्या और अतिशेष होता अध्यापक । पद्दोन्नति लगभग अकल्पनीय हो चुकी है । आज और अभी से आप अंदाजा लगा लो की नए आदेशों के अनुसार आप अपने जिले में स्वयं को किस शाला में पदस्थ पायेंगे । मेरा ये प्रश्न माध्यमिक शालाओं में वर्तमान में पदस्थ और भविष्य में पदोन्नत होने वाले सहायक अध्यापकों से है । अत्यंत विषम परिस्थिति निर्मित हो चुकी है और हम राज्य परिवहन के बहुत करीब पहुँच चुके हैं ।
इस पूरे मामले को गंभीरता से समझने वाले साथियों से आगृह है की न्यायालय के माध्यम से शासन से ये पूछा जाना चाहिए की क्या 140 से कम विद्यार्थी को हिंदी, विज्ञान, संस्कृत पढने के अधिकार से क्यों वंचित किया जा रहा है?
(लेखक स्वय अध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं )

जाग चुके अध्यापक को लोरी सुनाकर सुलाने की कोशिश-वासुदेव शर्मा (मुख्यमंत्री स्वगात समारोह भाग 1)


वासुदेव शर्मा- सीएम हाऊस के सम्मान समारोह से लौट रहे अध्यापकों के चेहरों से उत्साह गायब था और प्रतिक्रिया कुछ नहीं मिला जैसी थी। मैंने सवाल यह किया कि यह सम्मान समारोह क्यों आयोजित किया गया। जबाव जोरदार था। पांच अध्यापकों की टीम में से एक बोला हक के लिए जाग चुके अध्यापक को सुलाने की कोशिश भर थी यह, लेकिन  सीएम के रणनीतिकार यहां भी फैल हो गए। अध्यापकों के पांच संगठनों में से चार इस आयोजन से बाहर रहे और अध्यापक संघर्ष समिति पहसे से ज्यादा भरोसेमंद हो गई। अब जो संघर्ष समिति में बचे हैं, वे स्कूलों को बचाने तथा शिक्षा विभाग में संविलियन की लड़ाई को निर्णायक तरीके से लड़ सकेंगे।
         राज्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव ने सम्मान समारोह में न जाने का जो साहसिक निर्णय लिया है, उसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए। आयोजन से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वे सीएम हाऊस जरूर जाएंगे। जगदीश के ऊपर दबाव भी था। आयोजकों ने अनगिनत फोन उन्हें किए। यहां-वहां से दबाव भी डलवाया। सम्मान समारोह में शामिल होने के सवाल पर जगदीश, करतार सिंह, दिनेश शुक्ल, नागेंद्र त्रिपाठी जैसे अध्यापक नेता एक दिन पहले भोपाल में बैठे भी, जहां यह निर्णय लिया कि हमें सम्मान की वजाय संघर्ष के साथ रहना चाहिए। मतलब स्पष्ट है कि जगदीश यादव और उनकी टीम अध्यापक संघर्ष समिति के साथ पूरी ताकत से खड़ी है और यही वो ताकत है जिसने संघर्ष समिति को और भरोसेमंद बनाया है।
          सम्मान समारोह के आयोजक जिनमें अधिकांश वे लोग शामिल थे, जिनका जन्म ही मुरलीधर पाटीदार की आलोचना करके हुआ और यही लोग 6 नवंबर के सम्मान समारोह में  मुरलीधर पाटीदार के भाषण पर तालियां बजा रहे थे। सम्मान समारोह के इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर गंभीरता से सोचेंगे, तब आप पाएंगे कि आयोजक अपने ही समर्थकों की नजरों में कहां पहुंच गए होंगे। इस सम्मान समारोह के बाद कद मुरलीधर पाटीदार का ही बड़ा है और नुकसान में कौन पहुंचा, सम्मान कार्यक्रम के बाद यह अध्यापक समझ चुके हैं।
           अध्यापक संघर्ष समिति के तीन सदस्यों बृजेश शर्मा, मनोहर दुबे एवं राजेश नायक के बारे में सम्मान समारोह के आयोजकों की पहले ही राय थी कि यह लोग सम्मान समारोह की वजाय संघर्ष समिति के साथ रहेंगे, शायद इसीलिए इन्हें बुलाने में ज्यादा ताकत खर्च नहीं की गई। मुख्यमंत्री के सम्मान समारोह के जरिए सरकार ने जगदीश यादव, बृजेश शर्मा, मनोहर दुबे एवं राजेश नायक को एक साथ कर दिया। इन्होंने भी बिना देर किए 14 नवंबर को संघर्ष समिति की बैठक बुलाकर अगली रणनीति बनाने की घोषणा कर दी है, यही सम्मान समारोह के रणनीतिकारों की सबसे बड़ी असफलता है, वे खुद ही संघर्ष के रास्ते से अलग हो चुके हैं। सीएम हाऊस से लौट रहे अध्यापकों के चेहरों की निराशा आयोजकों के फ्लाप हो जाने का सबूत भी है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार है।)

राज्य शासन का सेवा पुस्तिका के सबन्ध में आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016

राज्य शासन का सेवा पुस्तिका  के सबन्ध में आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 

सेवा पुस्तिका की डुप्लीकेट कॉपी कार्यलय में रखी जाए ,एक कॉपी कर्मचारी को भी प्रदान की जाये ,इंक्रीमेंट लगाने पर कर्मचारी के भी हस्ताक्षर करवाये जाएँ ,डिजिटल सेवा पुस्तिका  भी बनाई जाए , आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 ।
आदेश दिनांक 20 अक्टूबर 2016 पीडीऍफ़ में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करे 






यात्रा भत्ता ,दैनिक भत्ता भोजन भत्ता एवं ठहराव भत्ता की दरो में संशोधन आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016 एव 5 सितम्बर 2012

यात्रा भत्ता ,दैनिक भत्ता भोजन भत्ता  एवं ठहराव भत्ता की दरो में संशोधन आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016

आदेश दिनांक 5 नवम्बर 2016 को पीडीऍफ़ में देखने के लिए इस लिंक को ओपन करें

राज्य वेतन आयोग की अनुसंशा अनुसार राज्य शासन के कर्मचारियों को दे यात्रा भत्ते की दरो का पुनरीक्षण 5 सितम्बर 2012
आदेश दिनाक 5 सितम्बर 2012 पीडीऍफ़ में देखने के लिए इस लिंक को ओपन करें  


 

Wednesday, November 9, 2016

हर जिले में अलग वेतन निर्धारण और अलग नीयम देखिये कितने प्रकार से गणना की जा रही है और असमानता क्या है ।

 देखने में आ रहा है की विभिन्न जिलो में अलग तरह से वेतन निर्धारण किया जा रहा है नरसिहपुर में 2007 से गणना कर के 6 टे वेतन के आधार पर तिन और दो वेतन वृद्धि प्रदान की गयी है।  झबुआ में 2007 में 5 वे वेतन में 2 और 3 वेतन वृद्धि लगा कर 6 टा वेतन मान प्रदान किया गया है 31 दिसम्बर को भी वेतन वृद्धि प्रदान की गयी है। अलीराजपुर में 6टे वेतन मान के आधार पर प्रारंभिक वेतन प्रदान किया गया है और 31 दिसम्बर को में भी वेतन वृद्धि लगायी गयी ही। जबकि रतलाम में 31 दिसम्बर तक 5 वे वेतन मान के आधार पर गणना कर के वेतन मान  दिया गया है ,व अध्यापक को क्रमोन्नति  नही लगायी गयी है। इसी प्रकार विद्यमान वेतन के सामने तत्स्थानी वेतन देखकर और सेवा अवधि देखकर भी गणना की गयी है। कई जगह आई आर की 2013 से वसूली भी की गयी है। यंहा हमने 1998  के अध्यापक संवर्ग की गणना बताई है आप स्वयं असमानता देखें।   



पदोन्नति में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ाई सुनवाई की तारीख

पदोन्नति में आरक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाकर 23 नवंबर कर दी है। इस मामले में मप्र सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसके बाद तारीख आगे बढ़ा दी गई।

जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की डबल बेंच इस मामले की सुनवाई की। इसके पहले सितंबर में बेंच के एक जज के बीमार होने से सुनवाई आगे बढ़ गई थी। हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण रद्द करने और 2002 से अब तक हुए प्रमोशन को रिवर्ट करने का आदेश दिया था। मप्र सरकार ने इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को रद्द कर चुका है। अजाक्स के अध्यक्ष जेएन कंसोटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हमें भी इंतजार है।

दोनों पक्षों के पास अपने-अपने तर्क

सरकार : राज्य सरकार 2002 से 2016 तक हुए प्रमोशन को रिवर्ट करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। सरकार का कहना है कि भले ही मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 गलत हों, लेकिन अब तक हुए प्रमोशन रिवर्ट न किए जाएं।

सपाक्स : अनारक्षित वर्ग के याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में तर्क देंगे कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर ही हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। यदि सरकार 2002 के नियमों को गलत मान रही है, तो पिछले 14 सालों की पदोन्नति को कैसे जायज ठहरा सकती है।
                 



एनसीईआरटी सिलेबस से प्रश्न-पत्र का प्रारूप भी बदलेगा

प्रदेश के स्कूलों में एनसीईआरटी सिलेबस लागू होने के बाद स्कूली शिक्षा में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। पाठ्यक्रम लागू होने पर पढ़ाई के साथ-साथ बोर्ड की परीक्षा पैटर्न में भी कुछ अंतर आ जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एनसीईआरटी का सिलेबस एक्टिविटी बेस्ड है, जिससे बच्चों को सीखने में आसानी होती है।

स्कूल शिक्षा विभाग की पदेन सचिव दीप्ती गौड़ मुकर्जी के मुताबिक एनसीईआरटी का सिलेबस लागू होने के बाद बोर्ड की परीक्षा में प्रश्न-पत्र का पैटर्न चेंज होगा। प्रश्न-पत्र में वैकल्पिक प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही मौजूदा दौर में पूछे जाने वाले प्रश्नों की जगह अवधारणा पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे।

शिक्षकों की दी जाएगी ट्रेनिंग
नया सिलेबस 2017 से लागू होगा। इसके लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी के भोपाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन से इस संबंध में बातचीत भी की है। जल्द ही पहली से सातवीं तक के शिक्षकों को यहां ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही 9वीं से 12वीं के शिक्षकों को भी इसे लेकर ट्रेनिंग दी जाएगी।

16 करोड़ का बोझ
मप्र पाठ्य पुस्तक निगम अगले शिक्षण सत्र के लिए नई किताबें छापेगा। छपाई से सरकार पर 16 करोड़ स्र्पए का बोझ आएगा।

500 और 1000 के पुराने नोट बंद ,कैसे बदलेंगे ? कन्हा चलेंगे ?ATM क्या काम करेंगे ? ई पेमेंट होगा या नहीं ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट को मंगलवार आधी रात से अमान्य घोषित करते हुए इस निर्णय के कारण उत्पन्न स्थितियों को देखते हुए 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक कुछ खास व्यवस्थाएं भी की हैं.

यंहा चलेंगे पुराने  नोट
इसके तहत अस्पतालों, सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल एवं सीएनजी गैस स्टेशनों, रेल यात्रा टिकट काउंटरों, शवदाह गृहों, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक छूट रहेगी. दुग्ध बिक्री केंद्रों, पेट्रोल एवं सीएनजी स्टेशनों आदि को स्टॉक एवं ब्रिकी का रजिस्टर रखना होगा. उन्होंने कहा कि 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये, 10 रुपये, 5 रुपये, एक रुपये के नोट और सभी सिक्के प्रचलन में रहेंगे और वैध होंगे.

ATM कैसे काम करेंगे 
मंगलवार आधी रात से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट अब महज कागज के टुकड़े बनकर रह गए हैं. ये सारे नोट गैरकानूनी माने जाएंगे. प्रधानमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 9 नवंबर को बैंक बंद रहेंगे और बुधवार गुरुवार को  दो दिनों तक कुछ एटीएम भी काम नहीं करेंगे.प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल शुरुआत के दिनों में खाते से धनराशि निकालने पर प्रतिदिन 2000  हजार रुपये और प्रति सप्ताह 20 हजार रुपये की सीमा रखी गई है. पीएम मोदी ने 2000 रुपये और 500 रुपये के नए नोट जारी किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि प्रारंभ में 4000 रुपये के नोट बदले जा सकेंगे और 25 नवंबर से 4000 रुपये की सीमा में वृद्धि की जाएगी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बयान में  मध्यरात्रि से 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के प्रचलन को समाप्त करने की घोषणा की,बयान अनुसार  जरूरी व्यवस्था करने के लिए कल एक दिन बैंक जनता के लिए बंद रहेंगे. उन्‍होंने कहा कि ‘यह जानकारी गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए सभी को इसी समय एक साथ दी जा रही है.रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों को बहुत कम समय में काफी व्यवस्था करनी है. ऐसे में कल बैंक बंद रहेंगे.’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि " बुधवार को बैंक बंद रहेंगे और कुछ एटीएम बुधवार और गुरुवार को बंद रहेंगे. उन्होंने कहा कि बैंकों और डाकघरों के कर्मचारी नई  व्यवस्था को उपलब्ध समय में सफल बनाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे. मोदी ने कहा कि चेक, बैंक ड्राफ्ट या अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों के भुगतान पूर्ववत रहेंगे और यह जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि इसके कारण लोगों को कुछ परेशानियां पेश आएंगी. लेकिन मेरा आग्रह होगा कि देशहित में वे इन कठिनाइयों को नजरअंदाज करें. हर देश के इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं जब व्यक्ति उस क्षण का हिस्सा बनना चाहता है और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनना चाहता है.ऐसे गिने-चुने मौके आते हैं और यह ऐसा एक मौका है.’मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार देश में गहरी जड़ें जमा चुका है.भ्रष्टाचार, जाली मुद्रा और आतंकवाद नासूर बन चुका है और अर्थव्यवस्था को जकड़ लिया है. हमारे दुश्मन जाली नोटों के जरिए भारत में रैकेट चला रहे हैं ."





500 और 2000 रुपये के नए नोट जो जल्‍द किए जाएंगे जारी...

पीएम मोदी ने कहा कि प्रारंभ में एटीएम से प्रतिदिन प्रति कार्ड 2000 रुपये निकाले जा सकेंगे. नई व्यवस्था के कारण पेश आने वाली कुछ परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आतंकवाद, कालाधन, जाली नोट के गोरखधंधे, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में देश की जागरुक जनता कुछ दिनों तक इस असुविधा को झेल लेगी.



.जानिए कैसे बदले जा सकते हैं 500-1000 रुपये के पुराने नोट

1. बैंकों में जमा कराएं 
अगले 50 दिनों तक इन 500 और 1000 रुपये के नोटों को आप बैंक में जाकर जमा करा सकते हैं.

2. बैंक नहीं तो डाकघर जाएं 
10 नवंबर से 30 दिसंबर तक आप चाहें तो डाकघरों में भी जाकर इनको जमा करा सकते हैं. इसलिए मौजूदा नोटों को लेकर परेशान होने की कतई जरूरत नहीं है.

3. इन तारीखों का रखें ध्‍यान 
इस संबंध में 10 नवंबर और 30 दिसंबर की तारीख आपके लिए खासा महत्‍व रखती है क्‍योंकि इसी दौरान आपके अपने पुराने इन नोटों को बदलना होगा. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इसके लिए कहा कि आपको बिल्‍कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि इस काम को करने के लिए आपके पास पूरे 50 दिन हैं.

4. बैंक की डेट निकले तो RBI है ना...
कुछ कारणों से जो लोग 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोट 30 दिसंबर तक जमा नहीं करा सकेंगे, वे लोग पहचान पत्र दिखाकर 31 मार्च, 2017 तक नोट बदलवा सकेंगे.

Tuesday, November 8, 2016

अध्यपको के वेतन को उलझा रहे अधिकारी


 6वां वेतनमान को लेकर लड़ाई जीत तो ली गई लेकिन संघर्ष अब भी बाकी है। अब मामला संकुल स्तर पर आकर अटक गया है। चार्ट के हिसाब से अध्यापकों का मासिक मूल वेतन कितना निर्धारित करें इसको लेकर अभी अभी संकुल प्राचार्यों में असमंजस की स्थिति है। 
अध्यापकों के वेतन निर्धारण के लिए चार्ट में जो फार्मूला दिया गया है वो वर्तमान में अध्यापकों को दिए जा रहे वेतन से मैच नहीं हो रहा। ऐसे में यदि अध्यापकों का ज्यादा वेतन निर्धारित कर दिया तो रिकवरी भी निकल सकती है। कम दिया तो अध्यापक भड़क सकते हैं। लिहाजा अधिकांश प्राचार्य जोखिम से बचने के लिए बीच का रास्ता निकालते हुए अध्यापकों से ये वचन पत्र तक भरवाना शुरू कर दिया है कि यदि ज्यादा वेतन का भुगतान कर दिया तो ये वचन दो कि भविष्य में ज्यादा लौटा दोगे या समायोजित कराने तैयार रहोगे। जबकि कुछ प्राचार्य आपस में ही मिल-बैठकर चार्ट के आधार पर अध्यापकों को एक जैसा वेतन देने की योजना बना रहे हैं।
ये है आदेश
अध्यापक संवर्ग के मूल वेतन की टेबल 6480 से 8310 रुपए के मूल वेतन तक दी गई है तो इसी मूलवेतन के हिसाब से छठवें वेतनमान की गणना वेतन निर्धारित करने कहा गया है।
यहां फंसा पेच
जिन अध्यापकों का मूल वेतन ही 7470 है उनका वेतन किस फार्मूले से निर्धारित करें ये चार्ट में है नहीं। चार्ट में दी गई टेबिल में मूल वेतन 7290 और 7500 रुपए दिया गया है। जिन्हें 12 साल हो गए और उन्हें क्रमोन्नति, पदोन्नति के बाद बढ़ा हुआ वेतन मिल रहा है उसके वेतन का चार्ट में जिक्र ही नहीं है।
ये है दुविधा
प्राचार्यों को ये दुविधा है कि यदि ऐसे अध्यापकों को 7290 मूल वेतन के हिसाब से वेतन निर्धारित करते हैं तो वेतन कम हो जाएगा। और मूल वेतन 7500 के हिसाब से गणना कर छठवां वेतनमान का लाभ दे दिया गया तो बाद में जो अंतर की राशि होगी वे अध्यापकों से बाद में वसूलनी पड़ेगी।
9 माह तक दी राहत, अब रिकवरी में भी उलझन
सहायक अध्यापक, अध्यापकों को छठे वेतनमान का लाभ देने से पहले 2013 से अंतरिम राहत दी जा रही है। छठवां वेतनमान जनवरी 2016 से दिए जाने के आदेश के बाद अंतरिम राहत दिया जाना भी बंद हो गया। लिहाजा 9 माह तक अध्यापकों को किश्तों में दी गई राहत वसूलना या समायोजित करने भी टेंशन हो रही।
इसे ऐसे समझें
सहायक अध्यापकों को वर्तमान में 2100 से 3 हजार रुपए तक अंतरिम राहत मिल रही है। जबकि अध्यापकों को 7800 रुपए अंतरिम राहत मिली। छठवां वेतनमान 1 जनवरी 2016 से देना है, इसलिए जनवरी से सितम्बर तक यानी 9 माह अध्यापकों को जो अंतरिम राहत दी गई है। वे वसूल (समायोजित ) की जाएगी, लेकिन वेतन निर्धारित न होने एरियर्स की राशि ज्यादा निकल रही या राहत की ये भी तय नहीं कर कर पा रहे।
"अध्यापकों को छठे वेतनमान के हिसाब से वेतन नहीं दिया जा रहा। संकुल प्राचार्य ये तय नहीं कर पा रहे कि वेतन का निर्धारण कैसे करें? संपरिक्षा निधि कार्यालय से मार्गदर्शन लिया जा कर उसे लागू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।"
- नरेन्द्र त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष,राज्य अध्यापक संघ
"अध्यापकों के वेतन निर्धारण के संबंध में कहां क्या परेशानी आ रही है उसे जल्द दूर किया जाएगा।'' -सतीश अग्रवाल, डीईओ
स्त्रोत भौपाल समाचार ।
        

उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने ई अटेंडेंस पर अध्यापको के लिए अंतरिम रोक लगायी ।

ग्वालियर। अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को सोमवार को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए शिक्षकों की रजिस्टर पर हाजिरी लेने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त लोक शिक्षण संचनालय को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस को चुनौती दी है।
लोक शिक्षण संस्थान ने 25 जून 2016 को एक आदेश जारी कर शासकीय विद्यालय के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की व्यवस्था की थी। इसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं। अरविंद कुमार दीक्षित सहित 150शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता केके श्रीवास्तव ने बताया कि ई-अटेडेंस की व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। दूर-दराज के स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क नहीं आता है। इससे शिक्षक हाजिरी नहीं लगा पा रहे हैं और उनका वेतन कट रहा है। अगर किसी शिक्षक का मोबाइल गिर जाता है और वह मोबाइल नहीं होने से अपनी हाजिरी नहीं लगा पाता है तो उसका वेतन कट जाता है।
श्रीवास्तव ने बताया कि लोक शिक्षण संस्थान का ई-अटेडेंस का आदेश शासकीय कर्मचारी पर लागू होता है। अध्यापक संवर्ग के कर्मचारी नगरीय निकाय व पंचायत के कर्मचारी हैं। इन पर यह आदेश लागू नहीं होता है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिए हैं स्कूल में रजिस्टर रखा जाए, जिसमें शिक्षकों की हाजिर लगाई जाए।

कैसे होते है संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव -सुरेश यादव (रतलाम)

दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क  संयुक्त राज्य अमेरिका जिसे हम अमेरिका भी कहते है ,वंहा  आज 8 नवंबर यानी मंगलवार को राष्ट्रपति के लिए मतदान होने वाला है ,तो आज यह लेख इस लिए की अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव प्रक्रिया किस प्रकार  भारतीय प्रणाली के समान है और किस प्रकार भिन्न होता है आप पढ सकें और समझ , यंहा प्रत्येक लिप वर्ष ( लिप इयर ) में चुनाव  प्रक्रिया सम्पन्न होती है और उसमे  पार्टियों द्वारा अपना उम्मीदवार चयन से लेकर मतदान और शपथ विधि तक के लिए  दिन पहले से तय है ऐसी परम्परा बन गयी है,संविधान अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष  प्रणाली से होता था जन्हा कोंग्रेस (वंहा की संसद कोंग्रेस के उच्च सदन सीनेट और निम्न सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव प्रतिनिधि सभा के सदस्य राष्ट्रपति का निर्वाचन करते थे )  कालांतर में वंहा प्रत्यक्ष प्रणाली अपना ली गयी .

                              



 इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन के बीच मुकाबला है. चुनाव अभियान के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच हुई बहस और आरोप-प्रत्यारोप ने दुनिया भर का ध्यान इस चुनाव की ओर खींचा है.

दुनिया में सबसे ताकतवर माने जाने वाले इस मुल्क के सबसे ताकतवर व्यक्ति का चुनाव काफी लंबा, पेचीदा और घुमावदार होता है. आइए जानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव किस तरह होता है...

इलेक्टोरल कॉलेज के जरिये चुने जाते हैं राष्ट्रपति
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-2 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया का जिक्र है. इसमें 'इलेक्टोरल कॉलेज' के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था है. हालांकि अमेरिकी संविधान निर्माताओं का एक वर्ग चाहता था कि राष्ट्रपति चुनने का अधिकार संसद को मिले, जबकि दूसरा धड़ा सीधी वोटिंग के जरिये चुनाव के हक में था. इन दोनों धड़ों के बीच हुए समझौते के बाद तब यह तरीका वजूद में आया.
जनवरी से नवंबर की शुरुआत तक चलती है प्रक्रिया
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में होते हैं और चुनाव प्रक्रिया जनवरी में शुरू होकर नवंबर के शुरुआती हफ्ते में मतदान तक चलती है. नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले मंगलवार को वोटिंग होती है और 20 जनवरी को इनॉग्रेशन डे पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करते हैं और उनका चार वर्षों का कार्यकाल शुरू हो जाता है.डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच ही मुकाबलायहां व्यवस्था भले ही बहुदलीय है, लेकिन आम तौर पर जनता दो ही दलों
- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के बीच ही चुनाव करती है. इन दोनों दलों के अलावा लिब्रेटेरियन, ग्रीन और कांस्टीट्यूशन पार्टी  के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी इस चुनाव में किस्मत आजमाते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम योग्यता 35 वर्ष की उम्र है. इसके अलावा  पिछले 14 सालों से अमेरिका में रह रहा हर नागरिक राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी का दावा कर सकता है.

'प्राइमरी' चुनाव से शुरू होती है चुनावी प्रक्रिया
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से 'प्राइमरी' चुनाव के साथ जनवरी में शुरू होती है, जो कि जून तक चलती है. इस दौर में पार्टी अपने उन उम्मीदवारों की सूची जारी करती है, जो राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में उतरना चाहते हैं. इसके बाद दूसरे दौर में अमेरिका के 50 राज्यों के वोटर पार्टी प्रतिनिधि (पार्टी डेलिगेट) चुनते हैं. हालांकि प्राइमरी स्तर पर पार्टी प्रतिनिधि चुनने के लिए अमेरिकी संविधान में कोई लिखित निर्देश नहीं है. इसलिए कुछ राज्यों में कॉकस के जरिये भी पार्टी प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर बैठक कर पार्टी प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है.
क्या होता है प्राइमरी और कॉकस?
कॉकस में पार्टी के सदस्य स्कूलों, घरों या फिर सार्वजनिक स्थलों पर जमा होते हैं और उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जाती है. वहां मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार का चयन करते हैं. वहीं प्राइमरी में मतपत्र के जरिये मतदान होता है. हर राज्य के नियमों के हिसाब से अलग-अलग तरह से प्राइमरी होती है और कॉकस प्रक्रिया भी हर राज्य के कानून के हिसाब से अलग-अलग होती है.फिर पार्टी डेलिगेट्स चुनते हैं राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवारप्राइमरी में चुने गए पार्टी प्रतिनिधि दूसरे दौर में पार्टी के सम्मेलन (कन्वेंशन) में हिस्सा लेते हैं. कन्वेनशन में ये प्रतिनिधि पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं. इसी दौर में नामांकन की प्रक्रिया होती है. इसके साथ ही राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार अपनी पार्टी की ओर से उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनता है.
तीसरे दौर में शुरू होता है चुनाव प्रचार
तीसरे दौर की शुरुआत चुनाव प्रचार से होती है. इसमें अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं. इसी दौरान उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर इस मामले से जुड़े मुद्दों पर बहस भी होती है.
स्विंग स्टेट्स पर उम्मीदवारों का पूरा जोर
आखिरी हफ्ते में, उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत 'स्विंग स्टेट्स' को लुभाने में झोंकते हैं. 'स्विंग स्टेट्स' वे राज्य होते हैं, जहां के मतदाता किसी भी पक्ष की ओर जा सकते हैं. इस वजह से दोनों ही दलों के उम्मीदवार इन राज्यों में जमकर प्रचार करते हैं, ताकि यहां के मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सकें.
वोटर चुनते हैं इलेक्टर, जो करते हैं राष्ट्रपति का चुनाव
चुनाव की अंतिम प्रक्रिया में 'इलेक्टोरल कॉलेज' राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है. हालांकि इससे पहले राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं, जो राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का घोषित समर्थक होता है. ये इलेक्टर एक 'इलेक्टोरल कॉलेज' बनाते हैं, जिसमें कुल 538 सदस्य होते हैं. 'इलेक्टर' चुनने के साथ ही आम जनता के लिए चुनाव खत्म हो जाता है. अंत में 'इलेक्टोरल कॉलेज' के सदस्य वोटिंग के जरिये अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल वोट जरूरी होते हैं.
बहुमत की झोली में चले जाते हैं सारे इलेक्टोरल वोट्स
अमेरिकी राज्य नेब्रास्का और माइने को छोड़ अन्य सभी 48 राज्यों में 'विजेता सब ले जाएगा' वाला नियम लागू है, इसमें जिस उम्मीदवार के ज्यादा इलेक्टर्स जीतते हैं, उसी की झोली में सारे इलेक्टोरल वोट चले जाते हैं. इन दो राज्यों नेब्रास्का और माइने में 'कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट मेथड' इस्तेमाल होता है, जहां प्रत्येक कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के अंदर एक इलेक्टर पापुलर वोट के जरिये, जबकि बाकी के दो इलेक्टर्स पूरे राज्य के पापुलर वोट के जरिये चुने जाते हैं.
हर राज्य में अलग होता इलेक्टर का कोटा
हर राज्य का इलेक्टर चुनने का कोटा तय होता है, जहां कैलीफॉर्निया में 55, टेक्सास में 38, न्यूयॉर्क- फ्लोरिडा में 29 और पेनसिल्वेनिया में 20 इलेक्टर्स होते हैं, वहीं अलास्का, मोंटाना, नार्थ एवं साउथ डकोटा, वर्मोन्ट और वायोमिंग में तीन-तीन इलेक्टर्स होते हैं. यह संख्या हर राज्य से अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) और सिनेट के सदस्यों की कुल संख्या के बराबर होती है. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सदस्य बैठते हैं. इन दोनों सदनों को मिलाकर संख्या होती है 535. इसके अलावा अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से तीन सदस्य आते हैं. यानी इसको मिलाकर 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनते हैं.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए तय रहती है तारीख
अमेरिका में चुनाव के लिए दिन और महीना बिलकुल तय होता है. यहां चुनावी साल के नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग होती है, जो कि इस बार 8 नवंबर को है. वहीं नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तारीख भी तय रहती है, जो कि लीप वर्ष  के अगले वर्ष हमेशा 21 जनवरी को होती है.


Monday, November 7, 2016

निजी विद्यालयों में ताला लगवाने की बात कर के सरकारी विद्यालयों में ताला लागवा रहे हैं मुख्य मंत्री -सुरेश यादव (रतलाम)

कल मुख्यमंत्री  ने अपने सम्मान समारोह में कहा कि अध्यापक इतना पढ़ाएं की,निजी विद्यालयों में ताले लग जाएं ।

लेकिन उनका ध्यान अपनी सरकार के उस निर्णय पर नहीं गया जिसके चलते वह , बैतूल और खंडवा में  कई सरकारी विद्यालयों पर ताले लगवा रही है। संयोग से यह समाचार कल ही प्रसारित हुआ है ।

विदित रहे राज्य सरकार बैतूल और खंडवा जिले में 2-2 मॉडल स्कूल का निर्माण पायलेट प्रोजेक्ट अंतर्गत कर रही है (पायलट प्रोजेक्ट को बाद में पुरे प्रदेश में लागु किया जा सकता है )। जिसके 10 से 25 किलोमीटर के दायरे  में सभी शासकीय विद्यालय बंद कर के उन विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चो को नविन मॉडल विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा । इन विद्यालयों में बच्चो के आने जाने के लिए  परिवहन के साधन भी उपलब्ध करवाए जायेगे यथा स्थिति स्कुल बस से बच्चों को लाया ले जाया जाएगा ।

10 किलो मीटर के दायरे में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर के एक माध्यमिक विद्यालय बनाया जाएगा वंही 25 किलो मीटर के दायरे में सभी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कुल को बंद कर के एक हायर सेकेंडरी बनाया जायेगा।

सरकार की ओर से दावा है कि इसके माध्यम से हमारे विद्यालयों में ,निजी विद्यालयों की तरह सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी । निश्चित रुप से यदि इसके पीछे की सच्चाई यही होती तो उसका स्वागत करना चाहिए ।

लेकिन हकीकत कुछ और है । उस हकीकत के पहले में इस योजना की भूमिका भी बताना चाहता हूँ ।

यह योजना बैतूल के विधायक एवं भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल के नवाचारवादी विचारों  का परिणाम है। श्री खंडेलवाल ने शिक्षा के बजट पर चर्चा के दौरान  कई विद्यालयो को बंद कर के एक विद्यालय बनाने का प्रस्ताव दिया था ।सरकार का मोटा मोटा अनुमान है कि वह प्रत्येक छात्र पर ,अध्य्यापक/शिक्षक  के वेतन ,मध्यान्ह भोजन ,गणवेश,छात्रवृति के अतिरक्त 2250 रूपये खर्च करती है । जबकि इस प्रकार सरकार को 1600 रूपये ही व्यय आएगा।

अब इसका प्रभाव या दुष्परिणाम जो हमे मोटे तौर पर नजर आ रहा है, गाँवों में  प्राथमिक विद्यालय  और माध्यमिक विद्यालय बंद कर दिए जाएंगे ।

उसके ,आगे क्या क्या हो सकता है ? इसका चिंतन आप करें।लेकिन माननिय मुख्यमंत्री की कथनी और करनी का अंतर साफ़ नज़र आ रहा है । सरकारी स्कूलों में ताला लगवा कर निजी विद्यालयों में ताला लगवाने की बात कर रहैं ।(लेखक सवयंअध्यापक हैं और यह उनके निजी विचार हैं )




पंचायतो के अध्यापको के लिए अनुग्रह राशी बढाई जाए- डी के सिंगौर (मंडला) का पत्र

प्रति,
प्रमुख सचिव
म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग
मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल

विषयः- जिला एवं जनपद पंचायत अन्तर्गत कार्यरत अध्यापक संवर्ग को अनुग्रह राशि अधिकत्तम 50 हजार दिये जाने के सम्बंध में।

सन्दर्भः-म.प्र.शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय, भोपाल का पत्र क्र/एफ/4-145/2016/18-1 भोपाल दिनांक 31/8/2016

महोदय,
विषयांकित सन्दर्भानुसार उल्लेख है कि म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 1-10/2005/20-1 दिनांक 23/12/2005 द्वारा शिक्षाकर्मियों को अनुग्रह राशि रूपये 25,000.00 देने के सम्बंध में आदेश पूर्व से हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्र एफ,1-54/09/20-1 दिनांक 13/10/2006 के द्वारा शिक्षाकर्मियों को देय अनुग्रह राशि के आदेश अध्यापक संवर्ग को यथावत लागू करने के आदेश हैं।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सन्दर्भित आदेश के द्वारा नगरीय निकाय में कार्यरत अध्यापक संवर्ग की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को अनुग्रह राशि की सीमा रू.25,000.00 से बढ़ाकर अधिकत्तम रूपये 50,000,00 की अनुमति 1/4/2016 से प्रदान की गई है। बावजूद इसके जिला एवं जनपद पंचायतों के अधीन कार्यरत अध्यापकों को अभी भी अधिकत्तम राशि रू.25,000,00 ही दिये जा रहें हैं इस सम्बंध राशि बढ़ाने हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किये गये हैं।

तत्सम्बंध में आग्रह है कि जिला एवं जनपद पंचायतों के अधीन कार्यरत अध्यापकों को भी अनुग्रह राशि रू.50,000.00 1/4/2016 से दिये जाने के आदेश जारी किये जायें। यदि 15 दिवस के अन्दर आदेश जारी नहीं किये जाते हैं तो संघ समानता का  अधिकार के उल्लघंन को लेकर न्यायालय जाने के लिये बाध्य होगा। 
      
(डी.के.सिंगौर)
क्र./डी./2016/311 मण्डला,दिनांक-..5/11/2016

प्रतिलिपिः-
प्रमुख सचिव म.प्र.शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल।
आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल।


Saturday, November 5, 2016

सामाजिक और नैतिक पतन रोकने के लिए व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का समावेश आवश्यक है -सुरेश यादव(रतलाम)

सुरेश यादव(रतलाम)- महाराष्ट्र के बुलढाणा में छात्रावास की मासूम बालिकाओ से शारीरिक शोषण का मामला सामने आया है ,इसमें शिक्षकों पर ही शोषण के आरोप लगाये गये हैं । 2 वर्ष पूर्व बस्तर में भी ऐसी ही एक घटना सामने आयी थी जँहा छात्रावास के शिक्षकों पर ही बच्चियों कें शारीरिक शोषण के आरोप लगाए गए थे ।
        5 नवम्बर  को ही रतलाम के जावरा में 9 वीं कक्षा के एक छात्र द्वारा ,विद्यालय कि गणवेश नहीं पहनने पर शिक्षक की फटकार के  चलते शिक्षक को गोली मार दी गयी । कुछ दिनों पहले दिल्ली में स्कूली छात्रों द्वारा होमवर्क नहीं करने पर शिक्षक की फटकार के चलते अपने शिक्षक की हत्या कर दी गयी थी ।
          उक्त घटनाक्रम ने ,न सिर्फ गुरु शिष्य के रिश्तों पर प्रश्न चिन्ह लगाया है । मानवीय सम्बंधो और संवेदनाओं को भी तार तार किया है।
          दूसरी तरफ
         
          लगभग 2 माह पूर्व की एक घटना में रतलाम की एक बच्ची ने अपने पिता द्वारा शारीरिक शोषण की  घटना अपने परिजनों को नहीं बता कर सीधे शिक्षकों को बताई ।  उत्तर प्रदेश के एक गाँव में अपने शिक्षक के स्थान्तरण पर बच्चों का फुट फुट कर रोना हम सोश्यल मिडिया पर देख चुके है । बाद में शिक्षक दिवस के अवसर पर  रवीश कुमार ने अपने कार्यक्रम में उसी विद्यालय और गाँव की रिपोर्ट भी प्रसारित की थी।
          इन घटनाओ में  बच्चो का शिक्षक के प्रति प्रेम और विश्वास नजर आता है ।
      लेंकिन संपूर्ण परिदृश्य एक  समान नही है । बच्चे घर के अतिरिक्त सबसे अधिक समय विद्यालयो में ही व्यतीत करते है, और वे अपने पालकों के अतिरिक्त सबसे अधिक विश्वास शिक्षक पर ही करते है ।
       आज का युग इंस्टेंट युग है,हम हर काम का त्वरित परिणाम चाहते है ,बच्चों पर पलकों द्वारा सफलता के लिए भारी दबाव बनाया जाता  है , बच्चे मानसिक रूप से मजबूत नहीं हो पा रहे है, उनका बचपन खो गया है , उनमे कई मानसिक विकार उतपन्न हो रहे हैं ।
        हम सिर्फ भौतिक ,व्यावसायिक और आर्थिक सफलता को ही सफल जीवन का पैमाना  मान रहे है । समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों  के आधार पर सफलता का आकलन नहीं किया जाता इस लिए इनका अवमूल्यन हो रहा है ।
         वेदों और शास्त्रों में गुरु को ईश्वर प्राप्ति का मार्गदर्शक बताया गया है यही नहीं गुरु की तुलना ईश्वर से भी की गयी है । तो रामायण के किषकिन्धा कांड में गुरु शिष्य के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए ,गुरु को पिता के समान और शिष्य को पुत्र-पुत्री के समान कहा गया है ।
       इतनी समृद्ध परम्पराओ और उच्च नैतिक मूल्यों वाले समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों का पतन चिंता का विषय है । इस लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का समावेश अत्यावश्यक हो गया है । शिक्षा से जुड़े हर तबके को इस विषय में गंभीर चिंतन करना चाहिए ।
    (लेखक सव्य अध्यापक है और यह उनके निजी विचार है )

अनुदान प्राप्त विद्यालयो में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग में ,संविलियन और अध्य्यापक संवर्ग के समान वेतन मान प्रदान करने का आदेश

प्रदेश के अनुदान प्राप्त विद्यालयो में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग में ,संविलियन और अध्य्यापक संवर्ग के समान वेतन मान प्रदान करने का आदेश जारी किया गया है । राज्य शासन ने यह आदेश ,उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में जारी किया है ।

 प्रकरण इस प्रकार था ," प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयो में वर्ष 1998 से 1 अप्रैल 2000 तक 107 शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति की गयी थी ।जिन्हें अभी तक अध्यापक भी नहीं बनाया गया था । जबलपुर निवासी रूपंजाली पिटर व अन्य ने वर्ष 2011 में उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर अध्यापक के समान वेतंन प्रदान करने की मांग की ,न्यायालय ने अध्यापक के समान वेतन और सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया गया ।शासन ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ,में पुनरीक्षण याचिका दायर की परंतु वह खारिज कर दी गयी। अब  राज्य शासन ने इन 93 शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग के समान वेतन और सुविधाएँ प्रदान करने का आदेश जारी किया है । आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इन लिंक को ओपन करें

 इसी प्रकार गत वर्ष भी राज्य शासन ने कुछ निजी विद्यालयों (उक्त विद्यालय को शासकीय विद्यालय बनाया जा चूका था ) में कार्यरत शिक्षा कर्मियों और अन्य स्टाफ का शिक्षा विभाग में संविलियन कर शिक्षक और अन्य की भाँती वेतन और सुविधाएं प्रादन करने के आदेश जारी किये  थे ।इस प्रकरण का अध्ययन करने और समझने के लिए आप इस लिंक को ओपन कर के आदेश और लेख देख सकते हैं।



शासनाधीन कि‍ए गए 22 वि‍द्यालयों में शि‍क्षाकर्मी/जि‍लाध्‍यक्ष दर/अंशकालीन दर पर स्‍वीकृत पदों के स्‍थान पर नि‍यमि‍त पद स्‍वीकृत कि‍ए जाने संबंधी 18 जून 2015

18 जून 2015 को जारी स्कूल शिक्षा मंत्रालय का आदेश यह कह कर प्रचारित किया जा रहा है। प्रदेश के 22 विद्यालयो के शिक्षा कर्मीयो को 1998 से शिक्षा विभाग में समिलित कर के एरियर भी दिया जा रहा है। कई लोग तो संगठनो के नाम से बधाई सन्देश भी जारी करने लगे ।

यह बात बिलकुल सही है की शिक्षाकर्मी साथियो का ही ,शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है लेकिन यह एक अर्ध सत्य है।पुरे मामले की वास्तविकता कुछ और ही है।


सम्पूर्ण प्रकरण की स्थिति यह है की प्रदेश के 22 निजी /(अशासकीय या प्रायवेट ) विद्यालयो को शासन ने ,1998 से 2001 तक अपने अधीन लिया 1995 की निति के अनुसार । इसके बाद शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षाकर्मी के समान और अन्य तृतीय - तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिलाधीश दर से वेतन दिया जाने लगा ( क्लेरिकल काम करने वाले हमारे साथी जिलाधीश दर को अच्छी तरह से समझते होंगे )


जबकि 1995 की अधिग्रहण निति के अनुसार सम्पूर्ण शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक ,शिक्षक,व्यख्याता ) के सामान और अन्य कर्मचारियों को तृतीय - चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के समान वेतन भत्तों और अन्य सुविधाओं की पत्राता थी। परंतु शासन ने शिक्षको को शिक्षाकर्मी और तृतीय चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियो अंशकालिक के रूप में जिलाधिश दर प्रदान की । 


इस से क्षुब्ध हो कर वँहा के स्टाफ ने न्यायालय की शरण ली । न्ययालय ने 1995 की निति का पालन करने के निर्देश दिए ।परंतु शासन ने 2 बार अपील की जो ख़ारिज हो गयी ,अंततोगत्वा शासन ने अपनी गलती मानकर 1995 की निति का पालन किया है।व इन 22 निजी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ को अधिग्रहण की दिनांक से शिक्षक संवर्ग के समान (प्रधान्ध्यापक /प्राचार्य को छोड़कर ),व अन्य स्टाफ को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामान वेतन व भत्ते प्रादान कर दिये है व पूर्व बकाया का एरियर 5 सामान वर्षिक किश्तों में प्रदान कर दिया है। अन्य सुविधाएं भी प्रदान कर दी गयी है।


वास्तविकता यह है की ये शिक्षा कर्मी साथी हमारे साथ व् हमारे नियमो के अंतर्गत भर्ती शिक्षा कर्मी नाही है ,हो सकता है यंहा कार्यरत कर्मचारी 1995 से पूर्व कार्यरत हों । 
और अधिक जानकारी इन जिलो में कार्यरत हमारे साथी भली भाँति दे सकते है।में स्वयं मेरी जानकारी का उदाहरण देता हूँ में खातेगांव जिला देवास का मूल निवासी हूँ ,वँहा पर ठाकुर सावदेकर राव निजी महाविद्यालय था इसका अधिग्रहण शासन ने 1989 में किया और वँहा पर कार्यरत स्टाफ सहायक प्राध्यापक सहित को शासकिय अधिकारी कर्मचारी के रूप में वेतन भत्ते व सुविधाएं दी जाने लगी।

साथियो आज कल सोशल मिडिया का जामाना है अफवाहें बड़ी तेजी से फैलती है। हम शिक्षक है समाज के जिम्मेदार नगरिको में गणना होती है। कम से कम हम तो अफवाह न फैलाएं । मेरा दावा है की यदि हम इस आदेश को ही एक बार ढंग से पढ़ लें तो सम्पूर्ण स्थिति साफ हो जाती।
सुरेश यादव ,कार्यकारी जिलाध्यक्ष ,राज्य अध्यापक संघ रतलाम 9926809650

आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें








शासनाधीन कि‍ए गए 22 वि‍द्यालयों में शि‍क्षाकर्मी/जि‍लाध्‍यक्ष दर/अंशकालीन दर पर स्‍वीकृत पदों के स्‍थान पर नि‍यमि‍त पद स्‍वीकृत कि‍ए जाने संबंधी 18 जून 2015

18 जून 2015 को जारी स्कूल शिक्षा मंत्रालय का आदेश यह कह कर प्रचारित किया जा रहा है। प्रदेश के 22 विद्यालयो के शिक्षा कर्मीयो को 1998 से शिक्षा विभाग में समिलित कर के एरियर भी दिया जा रहा है। कई लोग तो संगठनो के नाम से बधाई सन्देश भी जारी करने लगे ।

यह बात बिलकुल सही है की शिक्षाकर्मी साथियो का ही ,शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है लेकिन यह एक अर्ध सत्य है।पुरे मामले की वास्तविकता कुछ और ही है।


सम्पूर्ण प्रकरण की स्थिति यह है की प्रदेश के 22 निजी /(अशासकीय या प्रायवेट ) विद्यालयो को शासन ने ,1998 से 2001 तक अपने अधीन लिया 1995 की निति के अनुसार । इसके बाद शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षाकर्मी के समान और अन्य तृतीय - तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिलाधीश दर से वेतन दिया जाने लगा ( क्लेरिकल काम करने वाले हमारे साथी जिलाधीश दर को अच्छी तरह से समझते होंगे )


जबकि 1995 की अधिग्रहण निति के अनुसार सम्पूर्ण शैक्षणिक स्टाफ को शिक्षक संवर्ग (सहायक शिक्षक ,शिक्षक,व्यख्याता ) के सामान और अन्य कर्मचारियों को तृतीय - चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के समान वेतन भत्तों और अन्य सुविधाओं की पत्राता थी। परंतु शासन ने शिक्षको को शिक्षाकर्मी और तृतीय चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियो अंशकालिक के रूप में जिलाधिश दर प्रदान की । 


इस से क्षुब्ध हो कर वँहा के स्टाफ ने न्यायालय की शरण ली । न्ययालय ने 1995 की निति का पालन करने के निर्देश दिए ।परंतु शासन ने 2 बार अपील की जो ख़ारिज हो गयी ,अंततोगत्वा शासन ने अपनी गलती मानकर 1995 की निति का पालन किया है।व इन 22 निजी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ को अधिग्रहण की दिनांक से शिक्षक संवर्ग के समान (प्रधान्ध्यापक /प्राचार्य को छोड़कर ),व अन्य स्टाफ को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामान वेतन व भत्ते प्रादान कर दिये है व पूर्व बकाया का एरियर 5 सामान वर्षिक किश्तों में प्रदान कर दिया है। अन्य सुविधाएं भी प्रदान कर दी गयी है।


वास्तविकता यह है की ये शिक्षा कर्मी साथी हमारे साथ व् हमारे नियमो के अंतर्गत भर्ती शिक्षा कर्मी नाही है ,हो सकता है यंहा कार्यरत कर्मचारी 1995 से पूर्व कार्यरत हों । 
और अधिक जानकारी इन जिलो में कार्यरत हमारे साथी भली भाँति दे सकते है।में स्वयं मेरी जानकारी का उदाहरण देता हूँ में खातेगांव जिला देवास का मूल निवासी हूँ ,वँहा पर ठाकुर सावदेकर राव निजी महाविद्यालय था इसका अधिग्रहण शासन ने 1989 में किया और वँहा पर कार्यरत स्टाफ सहायक प्राध्यापक सहित को शासकिय अधिकारी कर्मचारी के रूप में वेतन भत्ते व सुविधाएं दी जाने लगी।

साथियो आज कल सोशल मिडिया का जामाना है अफवाहें बड़ी तेजी से फैलती है। हम शिक्षक है समाज के जिम्मेदार नगरिको में गणना होती है। कम से कम हम तो अफवाह न फैलाएं । मेरा दावा है की यदि हम इस आदेश को ही एक बार ढंग से पढ़ लें तो सम्पूर्ण स्थिति साफ हो जाती।
सुरेश यादव ,कार्यकारी जिलाध्यक्ष ,राज्य अध्यापक संघ रतलाम 9926809650

आदेश PDF में प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें








Friday, November 4, 2016

पुलिस की बर्बरता की कहानी - थाने में कपड़े उतरवाए, जूते चटवाए झूठा केस लगाकर दो मोबाइल व रुपए छीने ,सहायक अध्यापक ने दुखी होकर आत्महत्या कर ली

शिवपुरी/भोपाल. मध्य प्रदेश में एक गवर्नमेंट टीचर ( सहायक अध्यापक ) ने पुलिस की बदसलूकी की वजह से सुसाइड कर लिया। सहायक अध्यापक मनोज कुमार पुरोहित ने सीएम के नाम एक नोट भी छोड़ा है, जिसमें खुद के साथ बर्बरता का जिक्र है। इस नोट में मनोज ने पुलिस पर कपड़े उतरवाने, जूते चटवाने और झूठा केस लगाने जैसे आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट...सोश्यल मिडिया में वायरल हो गए हैं। 

 मनोज पुरोहित 29 अक्टूबर को जुआ एक्ट में अरेस्ट किए गए थे। सुसाइड नोट के मुताबिक इस दौरान उनके साथ बर्बरता हुई।
- उन्होंने सुसाइड से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान, कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, एसपी मोहम्मद युसुफ कुरैशी, अपने दो भाइयों, पिता व मां के नाम अलग-अलग लेटर लिखे।

पढ़िए मनोज का  मुख्यमंत्री के नाम पत्र 
श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय, 
मप्र शासन भोपाल 
सादर प्रणाम 

मैं मनोज कुमार पुरोहित सहायक अध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय शाजापुर में पदस्थ हूं। आज दिनांक 29 अक्टूबर 2016 को पुलिस थाना पिछोर के एसआई अरूण प्रताप सिंह भदौरिया, एएसआई जेपी पाराशर, दीवान शर्मा एवं दीवान जादौन, सिपाही रिंकू शाक्य ने मेरी बेइज्जती की। केबल इसलिए कि मेरे बड़े भाई एवं भांजे की बस चलती है, जिसे मैं कभी-कभी देख लेता था छुट्टी के दिन। मैंने पुलिस को पैसे देने से मना किया तो मेरे ऊपर दो जुआ एक्ट झूठे लगा रखे हैं। मैंने इस बात का विरोध किया तो मेरे ऊपर हथियार जैसे कट्टा, पिस्टल आदि लगाने की धमकी दी और कहा कि घर से रुपए मंगाओं एक लाख, तब ही तुम्हारी जमानत ले सकते हैं। मेरे साथ कुछ और लड़के भी बंद थे, उनसे भी पूछा जाए मेरी बेइज्जती की गई। मेरे बांये हाथ में टोनी के पास पट्‌टा मारा है एसआई अरुण प्रताप ने। मेरे गाल पर रिंकू सिपाही ने मारा है। कम से कम 10 चांटा और लात घूंसे मारे हैं। मैंने पुलिस से कहा कि मैं कोई आपराधिक प्रवृति का इंसान नहीं हूं तो जवाब दिया कि हमने तुम्हें अपराधी बना दिया है। अगर ज्यादा बोलोगे और बड़ा अपराधी बना देंगे। तुम पर पहले से एक जुआ एक्ट लगा है, जिसकी तुम तारीख कर रहे हो। ऐसे ही जेल भेज देंगे। मेरी जेब से वेतन निकाल ली। मेरे साथ पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं रहा मेरे पास सेमसंग मोबाइल जे-7 एवं लावा का मोबाइल नंबर 9425449013, 9620552340, 9575892725 की सिम डली हुई थी, उसे भी पु़लिस ने रख लिया है। इसी प्रकार कलेक्टर को लिखे पत्र में शिक्षक ने कहा कि मैं पुलिस की मनमानी और तानाशाही से दु:खी होकर आत्महत्या कर रहा हूं। एसआई अरुण प्रताप सिंह भदौरिया, एएसआई पाराशर, दीवान शर्मा, दीवान जादौन व सिपाही रिंकू ने मेरी बेइज्जती की है। थाने में मेरे कपड़े उतारे गए, रिंकू ने मुझमें चांटे मारे, एसआई भदौरिया ने पट्टे मारे, जूते मारे और जूते चटवाए और 1 लाख 50 हजार रुपए की मांग की। इसमें एक पत्रकार सचिन भट्ट उर्फ मोनू भी शामिल है। 

मनोज कुमार पुरोहित  



बेटे की मौत के जिम्मेदारों को बर्खास्त करे सरकार 


29 अक्टूबर को मेरे पुत्र मनोज को पुलिस जुआ एक्ट में झूठा फंसाने थाने ले गई थी। जहां उसकी निर्दयता से पिटाई की। अपमानित कर संगीन अपराधों में मुलजिम बनाने की धमकी देते हुए 25 हजार रुपए घर से उसे छुड़वाने के पुलिस ने लिए। साथ ही उसके दोनों मोबाइल भी छीन लिए। मारपीट करने व अपमानित होने से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। दु:खी होकर उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सरकार को दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। 

नारायण दास पुरोहित, मृत शिक्षक के पिता 

- इस मामले में टीचर के पिता नारायणदास पुरोहित ने कहा, "पुलिस की बर्बरता से अपमानित होने की वजह से उनके बेटे का मानसिक संतुलन बिगड़ गया।"
- "दुखी होकर उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सरकार को दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।"


6 लोगों पर की थी जुआ एक्ट में कार्रवाई

-जानकारी के मुताबिक पुलिस ने 29 अक्टूबर को शाजापुर स्कूल के टीचर मनोज समेत 6 लोगों पर जुआ एक्ट के तहत कारवाई की थी।
- पुलिस का दावा है कि आरोपियों से 35 हजार 40 रुपए जब्त किए गए थे। गिरफ्तार होने के बाद आरोपियों ने पुलिस पर थाने में मारपीट करने का आरोप लगाया था।


अन्य  लेटर में लिखा : मुझे माफ करना...कोई रोना मत, नैतिक चेष्ठा को समझना...

- मनोज ने भाई और पिता नारायणदास पुरोहित, मां और भाभी को लिखे लेटर में कहा, "मेरा निवेदन है कि मेरे दोनों बच्चे और पत्नी रूबी का ध्यान रखें। मैं उन्हें आप सभी के हवाले छोड़कर जा रहा हूं।"
- "सुरेश राजपूत, शारदा राजपूत आप भी मेरे बच्चों का ख्याल रखें। मेरी पत्नी रूबी को मेरा कहना है कि तुम इन सभी की बात मानना।"
- "अगर बच्चों का भविष्य बनाना है तो मेरी आखिरी बात यही है कि मेरे दोनों भाई तुम्हारे पिता के समान हैं। सभी से हाथ जोड़कर क्षमा चाहता हूं कि अपनी बेइज्जती की वजह से में यह कदम उठा रहा हूं।"
- "रजनी भाभी, मुझे माफ करना, दादा मुझे क्षमा करना, मैं आप सभी को छोड़कर जा रहा हूं। कोई रोना मत। नैतिक चेष्ठा को समझना, सभी खुश रहें।"

स्त्रोत दैनिक भास्कर 

MP के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा अब NCERT का सिलेबस ,अध्यापक संघर्ष समिति की 21 सूत्रीय मांग में था यह मुद्दा

भोपाल. पहली कक्षा से 11वीं तक के छात्र-छात्राएं भी अब नेशनल काउंसिल ऑफ एजूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की किताबें पढ़ेंगे। राज्य सरकार नए सत्र से 8वीं, 10वीं और 12वीं की बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं के गणित, विज्ञान और पर्यावरण के विषयों में एनसीईआरटी सिलेबस लागू करने जा रही है। बोर्ड कक्षाओं में इसे बाद में लागू किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग इसे जल्द ही कैबिनेट में लाने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि नए सत्र के लिए किताबों की छपाई का काम होना है। प्रदेश में स्कूली बच्चों को मुफ्त में किताबें दी जाती हैं। लिहाजा एनसीईआरटी से सिलेबस लेने के बाद उसकी छपाई का काम पाठ्यपुस्तक निगम से कराया जाएगा। अभी निजी स्कूल सीबीएसई के तहत एनसीईआरटी से ही मान्य किताबें इस्तेमाल करते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 1.30 करोड़ है। इसमें से 50 लाख के करीब विद्यार्थियों को राज्य सरकार मुफ्त किताबें उपलब्ध कराती है।

शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगामुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगा। साथ ही मप्र के बच्चों का राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता का प्रतिशत बढ़ेगा। अगले सत्र से एनसीईआरटी की किताबें लागू हो जाएंगी।दीपक जोशी, राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा



1998 के अध्यापको को छटे वेतनमान में 01 अप्रैल 2007 से तीन वेतनवृद्धियों का लाभ मिलेगा कोषालय में सहमति बनी -अरविन्द रावल झाबुआ

अरविन्द रावल झाबुआ-1998 में नियुक्त शिक्षाकर्मी यानि अध्यापको का छटे वेतनमान के गणना पत्रक के अनुसार 01 अप्रैल 2007 से तीन वेतनवृद्धियों का लाभ देकर की जाएगी ! हमारी टीम द्धारा कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद वरिष्ठ स्तर के अधिकारियो और लेखापालो ने आज हमारे द्धारा बनाये गये गणना पत्रक को सही ठहराते हुए वेतन निर्धारण करवाने पर सहमति प्रदान की हे ! हमारा सभी जिलो के अध्यापको से अनुरोध हे कि वे सभी हमारे द्धारा बनाई गई सारणी के अनुसार गणना कर अध्यापक सवर्ग का वेतन निर्धारण करवाये और अपने अपने संभाग की स्थानीय संपरीक्षा निधि कार्यालय से उक्त गणना पत्रक को पारित करवाये !