शिक्षा और उस से जुड़े संवर्ग की सेवाओं से जुडी जानकारीयां ,आप तक आसानी से पहुंचाने का एक प्रयास है अध्यापक जगत
Saturday, April 23, 2016
मार्गदर्शन दिनांक 7 जून 2014 निरस्त करने बाबद
अध्यापक संवर्ग के वेतन का अलग-अलग गणना से भुगतान एवं अंतरिम राहत किश्त में भी अलग-अलग सेवा गणना के संबंध में मार्गदर्शन दिनांक 7 जून 2014 निरस्त करने बाबद
अंतरिम राहत के निर्धारण के लिए स्प्ष्टीकरण (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 20/10/2014
दिनांक 01-04-2013 से अध्यापक संवर्ग को दिए गए वेतन बैण्ड एवं संवर्ग वेतन तथा दिनांक 01-08-2013 से चार वार्षिक किश्तों में अंतरिम राहत के अंतर्गत वेतन नियमन।
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अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01-09-2014 से अंतरित राहत ( पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ) द्वितीय किश्त के भुगतान की स्वीकृति बाबत।
अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01-09-2013 से अंतरित राहत की चार वार्षिक किश्तों में से प्रथम किश्त के उपरांत द्वितीय किश्त के भुगतान की स्वीकृति बाबत।
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संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 27/07/2011
संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 27/07/2011
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संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 03/09/2011
संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 03/09/2011 आदेश प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 21/02/2013
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 21/02/2013
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 03/10/2013
अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 03/10/2013
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अध्यापक संवर्ग की (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) अंतरिम राहत का आदेश 04/09/2013
अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) अंतरिम राहत का आदेश 04/09/2013
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अध्यापक संवर्ग के वेतन एवं अंतरिम राहत किश्त के संबंध में मार्गदर्शन 07/06/2014
अध्यापक संवर्ग के वेतन एवं अंतरिम राहत किश्त के संबंध में मार्गदर्शन 07/06/2014
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित वेतन के संबंध में स्कुल शिक्षा विभाग का आदेश 22/07/2010
अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित वेतन के संबंध में स्कुल शिक्षा विभाग का आदेश 22/07/2010
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अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01.01.2016 से छठवां वेतनमान स्वीकृत किए जाने बाबत (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 25/02/2016
अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01.01.2016 से छठवां वेतनमान स्वीकृत किए जाने बाबत (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 25/02/2016
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 03/10/2013
ध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 03/10/2013
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अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबंध में अंतरिम राहत के आदेश (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 04/09/2013
अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबंध में अंतरिम राहत के आदेश (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 04/09/2013
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Friday, April 22, 2016
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 21/02/2013
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान दिये जाने के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) का आदेश दिनांक 21/02/2013
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राज्य अध्यापक संघ के प्रतिनिधि मण्डल ने उच्च अधिकारियो, से मिलकर चर्चा की
राज्य अध्यापक संघ द्वारा पिछले 2 दिनों से लगातार 6वे वेतनमान की गणना पत्रक 【table】& तृतीय आई आर की के किश्त के आर्डर जारी करवाने के लिये लोक शिक्षण संचनालय. प्रमुख सचिव स्कुल शिक्षा विभाग . पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वित्त विभाग के समस्त उच्च अधिकारियो, से मिलकर चर्चा की । साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय को भी अवगत कराया गया एवं वस्तुस्थित्ति को जानने का प्रयास किया गया, जिसमे श्री मोहंती जी उज्जैन प्रवास पर है सेक्शन से जानकारी मिली की ऊपर स्तर पर कार्यवाही हो रही है, लेकिन आर्डर कब जारी होंगे ये कोई भी संतोष जनक जवाब नही दे पा रहे है, तृतीय आई आर की किश्त के सम्बन्ध में नवागत सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्री रमेश थेटे ,से मिले किश्त की फाइल उनके पास प्रस्तुतिकरण हेतु है उन्होंने आवेदन को मार्क कर दिया है और कहा इसको में करवाता हूँ,, गौरतलब है की पिछले दिनों श्री मुरली धर पाटीदार जी & जगदीश यादव जी ,ने भी अधिकारियो से चर्चा की है और आज भी फोन पर सम्बंधित अधिकारियो से चर्चा की और इस हेतु राज्य अध्यापक संघ के प्रतिनिधि मण्डल को शासन से चर्चा हेतु भेजा जिसमे श्री एच एन नरवरिया, मीडिया प्रभारी, श्री शालिक राम चौधरी, वरिष्ट पदा धिकारी , श्री बी एल मालवीय , प्रान्त सचिव, आदि थे ।
आर्डर जल्दी जारी करवाने लिए माननिय मुख्यमंत्री महोदय से शीघ ही चर्चा की जायेगी, यदि फिर भी आर्डर और गणना पत्रक में विसंगति पायी जाती है तो राज्य अध्यपाक संघ शीघ ही बैठक कर शिक्षा के व्यवसायीकरण के साथ साथ इस मुद्दे पर आंदोलन का एलान करेगा ।
Thursday, April 21, 2016
शिक्षक की छवि धूमिल करने वाले समाचार पत्रो पर कार्य वाही हो :- राशी राठौर
सरकार की नजर मै शिक्षक से बडा फर्जीवाड़ा करने वाला कोई नही। शिक्षा विभाग मै कार्यरत हर कर्मचारी पर सरकार इस कदर शंका करती है जैसै स्टाम्प घोटाले से लेके व्यापम घोटाले तक सब कुछ शिक्षक ने ही किया हो। सरकार बार बार चना फुटाने खाने वाले बोल के जिन शिक्षको पर आरोप लगाती है उन आरोपो की हकीकत ये है की आज तक शिक्षा विभाग मै कार्यरत इन अध्यापको को शिक्षक कहलाने का भी हक नही दिया सरकार ने। फिर किस मुँह से अध्यापको की निष्ठा पर अंगूली उठायी जाती है ? शिक्षक ना हुआ जैसै किसान का बैल हो गया जिसे उठा के कटाई, बुआई, बोझ ढोना हर जगह जोत दो।फिर कहो ये बैल कामचोर हो गया है। ग्रीष्मकालीन अवकाश हर बार प्रशिक्षण और अन्य कार्यों की भेंट चढ जाते है। इस बार भारत उदय या वी ई आर की भेंट चढा तो कोई अनोखी बात नही।समाज को लगता है मास्टर से ज्यादा मजे मै कोई नही। किन्तु सच तो मास्टर ही जानते है की उनको कितना आन्नद आ रहा है, बेचारा मास्टर गांव-खेडे मै बैठकर पांच हजार मै रोज घन्टी बजा रहा है। वी ई आर अपडेशन के मामले मै एक समाचार पत्र ने अध्यापक कर्तव्य निष्ठा पर किचड उछाला है। जब शिक्षक राष्टीय कार्यक्रम को अपने उदेश्य तक पहुचा सकते हे , अध्यापक निष्ठा से चुनाव संपन्न करवा सकते है, पोलीयो देश से मिटा सकते है, सही जनगणना कर सकते है तो, वी ई आर मै फर्जी कैसे हो गये ??? संबंधित समाचार पत्र ने निराधार आरोप लगाकर अध्यापक की छबि धूमिल की है। शिक्षकों को सोंपे गये हर कार्य कि मानीटरिंग जनशिक्षक से लेकर , बी आर सी, संकुल प्राचार्य, बी ईओ, डीईओ, जिला कलेक्टर तक करते है। तो क्या ये माना जाये की इन सभी माननीय की कार्यशैली पर संबंधित समाचार पत्र प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। गुरूओ की निष्ठा पर निराधार आरोप लगाने वालो पर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।
कु.राशी राठौर देवास
यह लेखिका के निजी विचार हैं, वे स्वयं संविदा शाला शिक्षक हैं।
नियमो की आड़ में शिक्षक के अवकाश पर केंची:- सुरेश यादव
समाज में यह वातावरण बनाया गया है की अध्यापन कार्य में लगे शिक्षको/अध्यापको को खूब अवकाश मिलते हैं। लेकिन नियमो में लगातार बदलाव कर के शिक्षको के अवकाश में लगातार काँट छाँट की जा रही है ।
साथियों आप जानते ही है की अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारीयो - अधिकारियों को ही समय समय पर विश्राम दिया जाता है। क्योकि अध्यापन का कार्य मानसिकश्रम है ,और इस मानसिक कार्य को पूर्ण मनोयोग व कुशलता से करने के लिए अवकाश की आवश्यकता रहती है ।विश्राम की अवधि में अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारी ,विश्राम कर के अपने आप को तरोताजा कर सकते हैं । वंही अवकाश की अवधी में कार्य करने पर अनुपातिक अर्जित अवकाश की पात्रता रहती थी ।जो हमारे अवकाश लेखा में दर्ज किये जाते थे ।
इसके अतिरिक्त 2008 तक विश्राम अवकाश संवर्ग के अधिकारियों -कर्मचारियों को 10 वार्षिक अर्जित अवकाश प्रदान किये जाते थे यह 31 मार्च को अवकाश लेखा में दर्ज किये जाते थे ,अब यह सुविधा 30 जून 2008 के आदेश से समाप्त कर दी गयी है ।कार्यालयीन संवर्ग के अधिकारियो - कर्मचारीयो 10 वार्षिक अर्जित अवकाश अब भी प्रदान किये जा रहे हैं।
साथियो 30 जून 2008 के वित्त विभाग के आदेश कारण ग्रीष्म अवकाश 45 दिवस का कर दिया गया ।आम जन में यह भ्रान्ति है की अध्यापन कार्य करने वाले संवर्ग को ग्रीष्मावकाश,दीपावली,दशहरा ,शीतकालीन अवकाश , मिला कर बहुत सारे या 55-60 अवकाश मिलते है ।परन्तु वस्तवकिता यह है की कार्यालयीन संवर्ग और हमारे अवकाश का अंतर सिर्फ 20 का ही रह जाता है ।
साथियों में अपनी बात को दोहराता हूँ ,अब आप स्वयं तय करे की 20 दिवस के अंतर के कारण 10 वार्षिक अर्जित अवकाश निरस्त करना क्या उचित है ? में यह प्रश्न आप के लिए छोड़ता हूँ । और आगे बढ़ते हुए कल जारी आदेश के विषय पर आता हूँ ,कल डीपीआई से पृष्ठांकित आदेश में यह निर्देश है की ,आवकाश संवर्ग के कर्मचारियों को जिलाधीश और विभागाध्यक्ष के आदेश पर रोकने पर ही अर्जित अवकाश की पात्रता रहेगी ।
इस प्रकार एक नया नियम बना कर अर्जित अवकाश की पत्रता समाप्त कर दी गई । यदि आदेश जिलाधीश और विभागाध्यक्ष (विभागीय आयुक्त )द्वारा जारी नहीं किये जाते । तो विश्राम अवकाश के दौरान काम करने पर अर्जित अवकाश ,अवकाश लेखा में दर्ज नहीं होंगे ।
साथियो आप जानते ही है हम ग्रीष्मावकाश में आयोजित प्रशिक्षण ,सर्वे,जनगणना,मतदाता सूचि का कार्य या अन्य कार्य ,डाइट प्राचार्य,एस डी एम, डी पी सी,डी ई ओ के आदेश पर ही करते है । तो इस आवकाश अवधी में कार्य करने पर अर्जित अवकाश किस प्रकार दर्ज होंगे ,यह बड़ा प्रश्न है ।
साथियो हमारे अवकाश पर लगातार कैची चलती जा रही है तो क्यों न अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारीयो को अब कार्यालयीन संवर्ग ही माना जाए ।
सुरेश यादव कार्यकारी जिलाध्यक्ष राज्य अध्यापक संघ रतलाम ।
समान स्कूल प्रणाली एकमात्र विकल्प:-सियाराम पटेल
समान स्कूल प्रणाली एकमात्र विकल्प
देश के सारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इसके लिए यह भी जरुरी है कि देश में कानून बनाकर पड़ोसी स्कूल पर आधारित समान स्कूल प्रणाली लागू की जाए। इसका मतलब यह है कि एक गांव या एक मोहल्ले के सारे बच्चे (अमीर या गरीब, लड़के या लड़की, किसी भी जाति या धर्म के) एक ही स्कूल में पढ़ेंगे। इस स्कूल में कोई फीस नहीं ली जाएगी और सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। यह जिम्मेदारी सरकार की होगी और शिक्षा के सारे खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। सामान्यत: स्कूल सरकारी होगें, किन्तु फीस न लेने वाले परोपकारी उद्देश्य से (न कि मुनाफा कमाने के उद्देश्य से) चलने वाले कुछ निजी स्कूल भी इसका हिस्सा हो सकते हैं। जब बिना भेदभाव के बड़े-छोटे, अमीर-गरीब परिवारों के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ेगें तो अपने आप उन स्कूलों की उपेक्षा दूर होगी, उन पर सबका ध्यान होगा और उनका स्तर ऊपर उठेगा। भारत के सारे बच्चों को शिक्षति करने का कोई दूसरा उपाय नहीं है। दुनिया के मौजूदा विकसित देशों में कमोबेश इसी तरह की स्कूल व्यवस्था रही है और इसी तरह से वे सबको शिक्षति बनाने का लक्ष्य हासिल कर पाए हैं। समान स्कूल प्रणाली का प्रावधान किए बगैर शिक्षा अधिकार विधेयक महज एक छलावा है।
इस विधेयक में और कई कमियां हैं। यह सिर्फ 6 से 14 वर्ष की उम्र तक (कक्षा 1 से 8 तक) की शिक्षा का अधिकार देने की बात करता है। इसका मतलब है कि बहुसंख्यक बच्चे कक्षा 8 के बाद शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। कक्षा 1 से पहले पू्र्व प्राथमिक शिक्षा भी महत्वपू्र्ण है। उसे अधिकार के दायरे से बाहर रखने का मतलब है सिर्फ साधन संपन्न बच्चों को ही केजी-1, केजी-2 आदि की शिक्षा पाने का अधिकार रहेगा। शुरुआत से ही भेदभाव की नींव इस विधेयक द्वारा डाली जा रही है।
शिक्षा अधिकार विधेयक में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों का आरक्षण गरीब बच्चों के लिए करने का प्रावधान किया गया है और उनकी ट्यूशन फीस का भुगतान सरकार करेगी। किन्तु महंगे निजी स्कूलों में ट्यूशन फीस के अलावा कई तरह के अन्य शुल्क लिए जाते हैं, क्या उनका भुगतान गरीब परिवार कर सकेगें ? क्या ड्रेस, कापी-किताबों आदि का भारी खर्च वे उठा पाएंगे ? क्या यह एक ढकोसला नहीं होगा ? फिर क्या इस प्रावधान से गरीब बच्चों की शिक्षा का सवाल हल हो जाएगा ? वर्तमान में देश में स्कूल आयु वर्ग के 19 करोड़ बच्चे हैं। इनमें से लगभग 4 करोड़ निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। मान लिया जाए कि इस विधेयक के पास होने के बाद निजी स्कूलों में और 25 प्रतिशत यानि 1 करोड़ गरीब बच्चों का दाखिला हो जाएगा, तो भी बाकी 14 करोड़ बच्चों का क्या होगा ? इसी प्रकार जब सरकार गरीब प्रतिभाशाली बच्चों के लिए नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा कन्या विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय और अब प्रस्तावित मॉडल स्कूल खोलती है, तो बाकी विशाल संख्या में बच्चे और ज्यादा उपेक्षति हो जाते है। ऐसी हालत में, देश के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने की बात महज एक लफ्फाजी बनकर रह जाती है। सियाराम पटेल
लेखक आई टी सेल, राज्य अध्यापक संघ के सदस्य हैं और नरसिंपुर जिले के हैं।
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Saturday, April 23, 2016
मार्गदर्शन दिनांक 7 जून 2014 निरस्त करने बाबद
अध्यापक संवर्ग के वेतन का अलग-अलग गणना से भुगतान एवं अंतरिम राहत किश्त में भी अलग-अलग सेवा गणना के संबंध में मार्गदर्शन दिनांक 7 जून 2014 निरस्त करने बाबद
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अंतरिम राहत के निर्धारण के लिए स्प्ष्टीकरण (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 20/10/2014
दिनांक 01-04-2013 से अध्यापक संवर्ग को दिए गए वेतन बैण्ड एवं संवर्ग वेतन तथा दिनांक 01-08-2013 से चार वार्षिक किश्तों में अंतरिम राहत के अंतर्गत वेतन नियमन।
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अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01-09-2014 से अंतरित राहत ( पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ) द्वितीय किश्त के भुगतान की स्वीकृति बाबत।
अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01-09-2013 से अंतरित राहत की चार वार्षिक किश्तों में से प्रथम किश्त के उपरांत द्वितीय किश्त के भुगतान की स्वीकृति बाबत।
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संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 27/07/2011
संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 27/07/2011
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संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 03/09/2011
संविदा शाला शिक्षकों के मासिक संविदा पारिश्रमिक में वृद्धि करने के संबंध में 03/09/2011 आदेश प्राप्त करने के लिए इस लिंक को ओपन करें
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 21/02/2013
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 21/02/2013
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 03/10/2013
अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) 03/10/2013
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अध्यापक संवर्ग की (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) अंतरिम राहत का आदेश 04/09/2013
अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबध में (नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ) अंतरिम राहत का आदेश 04/09/2013
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अध्यापक संवर्ग के वेतन एवं अंतरिम राहत किश्त के संबंध में मार्गदर्शन 07/06/2014
अध्यापक संवर्ग के वेतन एवं अंतरिम राहत किश्त के संबंध में मार्गदर्शन 07/06/2014
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित वेतन के संबंध में स्कुल शिक्षा विभाग का आदेश 22/07/2010
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अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01.01.2016 से छठवां वेतनमान स्वीकृत किए जाने बाबत (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 25/02/2016
अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01.01.2016 से छठवां वेतनमान स्वीकृत किए जाने बाबत (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 25/02/2016
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अध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 03/10/2013
ध्यापक संवर्ग के क्रमोन्नित संवर्ग वेतन में संशोधन के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 03/10/2013
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अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबंध में अंतरिम राहत के आदेश (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 04/09/2013
अध्यापक संवर्ग की वेतन संरचना में परिवर्तन के संबंध में अंतरिम राहत के आदेश (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 04/09/2013
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Friday, April 22, 2016
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) 21/02/2013
अध्यापक संवर्ग को संशोधित वेतनमान दिये जाने के संबंध में (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) का आदेश दिनांक 21/02/2013
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राज्य अध्यापक संघ के प्रतिनिधि मण्डल ने उच्च अधिकारियो, से मिलकर चर्चा की
राज्य अध्यापक संघ द्वारा पिछले 2 दिनों से लगातार 6वे वेतनमान की गणना पत्रक 【table】& तृतीय आई आर की के किश्त के आर्डर जारी करवाने के लिये लोक शिक्षण संचनालय. प्रमुख सचिव स्कुल शिक्षा विभाग . पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वित्त विभाग के समस्त उच्च अधिकारियो, से मिलकर चर्चा की । साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय को भी अवगत कराया गया एवं वस्तुस्थित्ति को जानने का प्रयास किया गया, जिसमे श्री मोहंती जी उज्जैन प्रवास पर है सेक्शन से जानकारी मिली की ऊपर स्तर पर कार्यवाही हो रही है, लेकिन आर्डर कब जारी होंगे ये कोई भी संतोष जनक जवाब नही दे पा रहे है, तृतीय आई आर की किश्त के सम्बन्ध में नवागत सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्री रमेश थेटे ,से मिले किश्त की फाइल उनके पास प्रस्तुतिकरण हेतु है उन्होंने आवेदन को मार्क कर दिया है और कहा इसको में करवाता हूँ,, गौरतलब है की पिछले दिनों श्री मुरली धर पाटीदार जी & जगदीश यादव जी ,ने भी अधिकारियो से चर्चा की है और आज भी फोन पर सम्बंधित अधिकारियो से चर्चा की और इस हेतु राज्य अध्यापक संघ के प्रतिनिधि मण्डल को शासन से चर्चा हेतु भेजा जिसमे श्री एच एन नरवरिया, मीडिया प्रभारी, श्री शालिक राम चौधरी, वरिष्ट पदा धिकारी , श्री बी एल मालवीय , प्रान्त सचिव, आदि थे ।
आर्डर जल्दी जारी करवाने लिए माननिय मुख्यमंत्री महोदय से शीघ ही चर्चा की जायेगी, यदि फिर भी आर्डर और गणना पत्रक में विसंगति पायी जाती है तो राज्य अध्यपाक संघ शीघ ही बैठक कर शिक्षा के व्यवसायीकरण के साथ साथ इस मुद्दे पर आंदोलन का एलान करेगा ।
Thursday, April 21, 2016
शिक्षक की छवि धूमिल करने वाले समाचार पत्रो पर कार्य वाही हो :- राशी राठौर
सरकार की नजर मै शिक्षक से बडा फर्जीवाड़ा करने वाला कोई नही। शिक्षा विभाग मै कार्यरत हर कर्मचारी पर सरकार इस कदर शंका करती है जैसै स्टाम्प घोटाले से लेके व्यापम घोटाले तक सब कुछ शिक्षक ने ही किया हो। सरकार बार बार चना फुटाने खाने वाले बोल के जिन शिक्षको पर आरोप लगाती है उन आरोपो की हकीकत ये है की आज तक शिक्षा विभाग मै कार्यरत इन अध्यापको को शिक्षक कहलाने का भी हक नही दिया सरकार ने। फिर किस मुँह से अध्यापको की निष्ठा पर अंगूली उठायी जाती है ? शिक्षक ना हुआ जैसै किसान का बैल हो गया जिसे उठा के कटाई, बुआई, बोझ ढोना हर जगह जोत दो।फिर कहो ये बैल कामचोर हो गया है। ग्रीष्मकालीन अवकाश हर बार प्रशिक्षण और अन्य कार्यों की भेंट चढ जाते है। इस बार भारत उदय या वी ई आर की भेंट चढा तो कोई अनोखी बात नही।समाज को लगता है मास्टर से ज्यादा मजे मै कोई नही। किन्तु सच तो मास्टर ही जानते है की उनको कितना आन्नद आ रहा है, बेचारा मास्टर गांव-खेडे मै बैठकर पांच हजार मै रोज घन्टी बजा रहा है। वी ई आर अपडेशन के मामले मै एक समाचार पत्र ने अध्यापक कर्तव्य निष्ठा पर किचड उछाला है। जब शिक्षक राष्टीय कार्यक्रम को अपने उदेश्य तक पहुचा सकते हे , अध्यापक निष्ठा से चुनाव संपन्न करवा सकते है, पोलीयो देश से मिटा सकते है, सही जनगणना कर सकते है तो, वी ई आर मै फर्जी कैसे हो गये ??? संबंधित समाचार पत्र ने निराधार आरोप लगाकर अध्यापक की छबि धूमिल की है। शिक्षकों को सोंपे गये हर कार्य कि मानीटरिंग जनशिक्षक से लेकर , बी आर सी, संकुल प्राचार्य, बी ईओ, डीईओ, जिला कलेक्टर तक करते है। तो क्या ये माना जाये की इन सभी माननीय की कार्यशैली पर संबंधित समाचार पत्र प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। गुरूओ की निष्ठा पर निराधार आरोप लगाने वालो पर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।
कु.राशी राठौर देवास
यह लेखिका के निजी विचार हैं, वे स्वयं संविदा शाला शिक्षक हैं।
नियमो की आड़ में शिक्षक के अवकाश पर केंची:- सुरेश यादव
समाज में यह वातावरण बनाया गया है की अध्यापन कार्य में लगे शिक्षको/अध्यापको को खूब अवकाश मिलते हैं। लेकिन नियमो में लगातार बदलाव कर के शिक्षको के अवकाश में लगातार काँट छाँट की जा रही है ।
साथियों आप जानते ही है की अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारीयो - अधिकारियों को ही समय समय पर विश्राम दिया जाता है। क्योकि अध्यापन का कार्य मानसिकश्रम है ,और इस मानसिक कार्य को पूर्ण मनोयोग व कुशलता से करने के लिए अवकाश की आवश्यकता रहती है ।विश्राम की अवधि में अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारी ,विश्राम कर के अपने आप को तरोताजा कर सकते हैं । वंही अवकाश की अवधी में कार्य करने पर अनुपातिक अर्जित अवकाश की पात्रता रहती थी ।जो हमारे अवकाश लेखा में दर्ज किये जाते थे ।
इसके अतिरिक्त 2008 तक विश्राम अवकाश संवर्ग के अधिकारियों -कर्मचारियों को 10 वार्षिक अर्जित अवकाश प्रदान किये जाते थे यह 31 मार्च को अवकाश लेखा में दर्ज किये जाते थे ,अब यह सुविधा 30 जून 2008 के आदेश से समाप्त कर दी गयी है ।कार्यालयीन संवर्ग के अधिकारियो - कर्मचारीयो 10 वार्षिक अर्जित अवकाश अब भी प्रदान किये जा रहे हैं।
साथियो 30 जून 2008 के वित्त विभाग के आदेश कारण ग्रीष्म अवकाश 45 दिवस का कर दिया गया ।आम जन में यह भ्रान्ति है की अध्यापन कार्य करने वाले संवर्ग को ग्रीष्मावकाश,दीपावली,दशहरा ,शीतकालीन अवकाश , मिला कर बहुत सारे या 55-60 अवकाश मिलते है ।परन्तु वस्तवकिता यह है की कार्यालयीन संवर्ग और हमारे अवकाश का अंतर सिर्फ 20 का ही रह जाता है ।
साथियों में अपनी बात को दोहराता हूँ ,अब आप स्वयं तय करे की 20 दिवस के अंतर के कारण 10 वार्षिक अर्जित अवकाश निरस्त करना क्या उचित है ? में यह प्रश्न आप के लिए छोड़ता हूँ । और आगे बढ़ते हुए कल जारी आदेश के विषय पर आता हूँ ,कल डीपीआई से पृष्ठांकित आदेश में यह निर्देश है की ,आवकाश संवर्ग के कर्मचारियों को जिलाधीश और विभागाध्यक्ष के आदेश पर रोकने पर ही अर्जित अवकाश की पात्रता रहेगी ।
इस प्रकार एक नया नियम बना कर अर्जित अवकाश की पत्रता समाप्त कर दी गई । यदि आदेश जिलाधीश और विभागाध्यक्ष (विभागीय आयुक्त )द्वारा जारी नहीं किये जाते । तो विश्राम अवकाश के दौरान काम करने पर अर्जित अवकाश ,अवकाश लेखा में दर्ज नहीं होंगे ।
साथियो आप जानते ही है हम ग्रीष्मावकाश में आयोजित प्रशिक्षण ,सर्वे,जनगणना,मतदाता सूचि का कार्य या अन्य कार्य ,डाइट प्राचार्य,एस डी एम, डी पी सी,डी ई ओ के आदेश पर ही करते है । तो इस आवकाश अवधी में कार्य करने पर अर्जित अवकाश किस प्रकार दर्ज होंगे ,यह बड़ा प्रश्न है ।
साथियो हमारे अवकाश पर लगातार कैची चलती जा रही है तो क्यों न अध्यापन कार्य में लगे कर्मचारीयो को अब कार्यालयीन संवर्ग ही माना जाए ।
सुरेश यादव कार्यकारी जिलाध्यक्ष राज्य अध्यापक संघ रतलाम ।
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समान स्कूल प्रणाली एकमात्र विकल्प:-सियाराम पटेल
समान स्कूल प्रणाली एकमात्र विकल्प
देश के सारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इसके लिए यह भी जरुरी है कि देश में कानून बनाकर पड़ोसी स्कूल पर आधारित समान स्कूल प्रणाली लागू की जाए। इसका मतलब यह है कि एक गांव या एक मोहल्ले के सारे बच्चे (अमीर या गरीब, लड़के या लड़की, किसी भी जाति या धर्म के) एक ही स्कूल में पढ़ेंगे। इस स्कूल में कोई फीस नहीं ली जाएगी और सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। यह जिम्मेदारी सरकार की होगी और शिक्षा के सारे खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। सामान्यत: स्कूल सरकारी होगें, किन्तु फीस न लेने वाले परोपकारी उद्देश्य से (न कि मुनाफा कमाने के उद्देश्य से) चलने वाले कुछ निजी स्कूल भी इसका हिस्सा हो सकते हैं। जब बिना भेदभाव के बड़े-छोटे, अमीर-गरीब परिवारों के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ेगें तो अपने आप उन स्कूलों की उपेक्षा दूर होगी, उन पर सबका ध्यान होगा और उनका स्तर ऊपर उठेगा। भारत के सारे बच्चों को शिक्षति करने का कोई दूसरा उपाय नहीं है। दुनिया के मौजूदा विकसित देशों में कमोबेश इसी तरह की स्कूल व्यवस्था रही है और इसी तरह से वे सबको शिक्षति बनाने का लक्ष्य हासिल कर पाए हैं। समान स्कूल प्रणाली का प्रावधान किए बगैर शिक्षा अधिकार विधेयक महज एक छलावा है।
इस विधेयक में और कई कमियां हैं। यह सिर्फ 6 से 14 वर्ष की उम्र तक (कक्षा 1 से 8 तक) की शिक्षा का अधिकार देने की बात करता है। इसका मतलब है कि बहुसंख्यक बच्चे कक्षा 8 के बाद शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। कक्षा 1 से पहले पू्र्व प्राथमिक शिक्षा भी महत्वपू्र्ण है। उसे अधिकार के दायरे से बाहर रखने का मतलब है सिर्फ साधन संपन्न बच्चों को ही केजी-1, केजी-2 आदि की शिक्षा पाने का अधिकार रहेगा। शुरुआत से ही भेदभाव की नींव इस विधेयक द्वारा डाली जा रही है।
शिक्षा अधिकार विधेयक में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों का आरक्षण गरीब बच्चों के लिए करने का प्रावधान किया गया है और उनकी ट्यूशन फीस का भुगतान सरकार करेगी। किन्तु महंगे निजी स्कूलों में ट्यूशन फीस के अलावा कई तरह के अन्य शुल्क लिए जाते हैं, क्या उनका भुगतान गरीब परिवार कर सकेगें ? क्या ड्रेस, कापी-किताबों आदि का भारी खर्च वे उठा पाएंगे ? क्या यह एक ढकोसला नहीं होगा ? फिर क्या इस प्रावधान से गरीब बच्चों की शिक्षा का सवाल हल हो जाएगा ? वर्तमान में देश में स्कूल आयु वर्ग के 19 करोड़ बच्चे हैं। इनमें से लगभग 4 करोड़ निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। मान लिया जाए कि इस विधेयक के पास होने के बाद निजी स्कूलों में और 25 प्रतिशत यानि 1 करोड़ गरीब बच्चों का दाखिला हो जाएगा, तो भी बाकी 14 करोड़ बच्चों का क्या होगा ? इसी प्रकार जब सरकार गरीब प्रतिभाशाली बच्चों के लिए नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा कन्या विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय और अब प्रस्तावित मॉडल स्कूल खोलती है, तो बाकी विशाल संख्या में बच्चे और ज्यादा उपेक्षति हो जाते है। ऐसी हालत में, देश के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने की बात महज एक लफ्फाजी बनकर रह जाती है। सियाराम पटेल
लेखक आई टी सेल, राज्य अध्यापक संघ के सदस्य हैं और नरसिंपुर जिले के हैं।
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